Bilaspur Airport High Court : बिलासपुर एयरपोर्ट के विस्तार और वहां से सीमित हवाई सेवाओं के संचालन को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। मामले की सुनवाई के दौरान माननीय न्यायालय ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि नाइट लैंडिंग की मंजूरी मिलने के बावजूद अब तक रात्रि उड़ानें शुरू न होना प्रशासन और संबंधित विभागों की बड़ी लापरवाही है।
राज्य सरकार और प्राधिकरणों से मांगा जवाब
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और विमानन प्राधिकरणों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वे इस देरी पर विस्तृत शपथ पत्र प्रस्तुत करें। कोर्ट ने यह सवाल भी उठाया कि जब सुविधाएं उपलब्ध हैं, तो आम जनता को उनका लाभ अब तक क्यों नहीं मिल रहा है। इसके साथ ही केवल एक एयरलाइन कंपनी पर निर्भर रहने के बजाय अन्य कंपनियों को जोड़ने के प्रयासों पर भी जानकारी मांगी गई है।
तकनीकी बहानों पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुनवाई में यह तथ्य सामने आया कि नाइट लैंडिंग की अनुमति काफी समय पहले मिल चुकी है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी तकनीकी कारणों का हवाला देकर सेवाओं को टाल रहे हैं। इस पर कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रक्रियाओं को लटकाने के बजाय परिणाम देने पर ध्यान दिया जाना चाहिए और जवाबदेही तय होनी चाहिए।
सेना ने सौंपी जमीन, विस्तार का मार्ग हुआ प्रशस्त
एयरपोर्ट के विस्तार को लेकर एक सकारात्मक पहलू यह रहा कि सेना ने अपनी लगभग 290 एकड़ जमीन जिला प्रशासन को हस्तांतरित कर दी है। इस अतिरिक्त भूमि के मिलने से अब एयरपोर्ट के पास कुल जमीन का क्षेत्रफल 646 एकड़ से अधिक हो गया है। इससे रनवे के विस्तार और बड़े विमानों की लैंडिंग का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।
बड़े विमानों के लिए रनवे अपग्रेड करने की तैयारी
जमीन मिलने के बाद अब एयरपोर्ट को उच्च श्रेणी में अपग्रेड करने की योजना पर काम तेज होने की उम्मीद है। रनवे की लंबाई बढ़ाने की तैयारी की जा रही है ताकि भविष्य में बड़े कमर्शियल विमानों की आवाजाही सुगम हो सके। प्रशासन का लक्ष्य एयरपोर्ट को आधुनिक सुविधाओं से लैस कर बिलासपुर की कनेक्टिविटी को देश के अन्य हिस्सों से मजबूत करना है।
अगली सुनवाई में कड़े फैसले के संकेत
बिलासपुर एयरपोर्ट का यह मामला पिछले कई वर्षों से न्यायिक निगरानी में है। हाईकोर्ट की लगातार सख्ती के कारण ही यहां से सेवाएं प्रारंभ हो पाई थीं, लेकिन सुविधाओं का पूर्ण विस्तार अब भी अधूरा है। न्यायालय ने संकेत दिया है कि यदि अगली सुनवाई तक कार्य में संतोषजनक प्रगति नहीं दिखी, तो विभाग के खिलाफ और भी कड़े कदम उठाए जा सकते हैं।


