सीजी भास्कर, 08 अप्रैल | तेहरान/वॉशिंगटन। मध्य-पूर्व में पिछले 40 दिनों से जारी भीषण संग्राम पर आखिरकार बुधवार को विराम (US Fighter Jets Destroyed) लग गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दो हफ्ते के युद्ध विराम की घोषणा करते हुए इसे अमेरिका की ‘पूर्ण जीत’ बताया है, तो वहीं दूसरी ओर ईरान ने इसे ट्रंप का ‘सरेंडर’ करार देते हुए अपनी सभी 10 शर्तों को मनवाने का दावा किया है।
जीत और हार के इन बड़े दावों के बीच इस युद्ध ने जो तबाही मचाई है, उसके आंकड़े रोंगटे खड़े करने वाले हैं। मिसाइलों और ड्रोन की इस भयंकर बारिश में न केवल हजारों मासूम जानें गईं, बल्कि दोनों ही पक्षों को ऐसा सैन्य और आर्थिक जख्म मिला है जिसकी भरपाई में दशकों लग जाएंगे।
ईरान को लगा नेतृत्व और सेना का बड़ा झटका (US Fighter Jets Destroyed)
ईरान के लिए यह युद्ध किसी त्रासदी से कम साबित नहीं हुआ है। मानवीय हानि की बात करें तो अलग-अलग रिपोर्टों में दावा किया गया है कि ईरान में करीब 2,000 से लेकर 7,300 लोगों की मौत हुई है, जिनमें बड़ी संख्या में बच्चे भी शामिल हैं। वहीं सैन्य मोर्चे पर ईरान ने अपनी सबसे बड़ी ताकत यानी ‘लीडरशिप’ को खो दिया है।
अमेरिका और इजरायल के सटीक हमलों में पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई सहित IRGC के लगभग 250 वरिष्ठ कमांडर और अधिकारी (US Fighter Jets Destroyed) मारे गए हैं। इसके अलावा अमेरिका का दावा है कि उसने ईरान के परमाणु ठिकानों पर 5 बार भीषण हमला कर उसे भारी नुकसान पहुँचाया है और उसकी मिसाइल क्षमता को 90 फीसदी तक ध्वस्त कर दिया है।
अमेरिका और इजरायल को भी झेलनी पड़ी भारी सैन्य क्षति
भले ही अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्ति है, लेकिन ईरान ने भी उसे जख्म देने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इस युद्ध में अब तक 13 अमेरिकी सैनिकों की जान गई है और करीब 700 से ज्यादा सैनिक घायल हुए हैं। सैन्य उपकरणों के मामले में अमेरिका को अरबों डॉलर का चूना लगा है।
ईरान के हमलों में अमेरिका के सबसे अत्याधुनिक लड़ाकू विमान F-35, F-15E स्ट्राइक ईगल और 17 से ज्यादा MQ-9 रीपर ड्रोन पूरी तरह कबाड़ में तब्दील हो चुके (US Fighter Jets Destroyed) हैं। यही नहीं, मध्य-पूर्व में स्थित अमेरिका के 17 सैन्य बेस पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं। इजरायल को भी इस जंग में बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है क्योंकि ईरान ने सीधे तेल-अवीव के सरकारी दफ्तरों, परमाणु ठिकानों और एयरबेस को अपना निशाना बनाया था।
खजाने पर पड़ा बोझ और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
इस युद्ध ने केवल इंसानी जानों को ही नहीं लील लिया, बल्कि दुनिया भर की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है। अकेले अमेरिका को युद्ध के शुरुआती 12 दिनों में ही ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के कारण 16.5 बिलियन डॉलर का आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा है। टॉमहॉक और पैट्रियट जैसी महंगी मिसाइलों के बेतहाशा इस्तेमाल ने खजाने पर भारी बोझ डाला है।
वैश्विक स्तर पर देखें तो ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के बंद होने से दुनिया भर में तेल और गैस की कीमतें आसमान छूने लगी हैं, जिससे यूरोप से लेकर एशिया तक ऊर्जा संकट पैदा हो गया है। आज भले ही युद्ध विराम हो गया हो, लेकिन इस बर्बादी के निशान दशकों तक पूरी दुनिया को मंदी और महंगाई की याद दिलाते रहेंगे।




