Durg Cyber Fraud News : दुर्ग जिले में साइबर ठगी की दो बड़ी वारदातें सामने आई हैं। ठगों ने अलग-अलग पैंतरे अपनाकर एक महिला और एक युवक को अपना शिकार बनाया और कुल ₹1.47 लाख की चपत लगा दी। पुलिस ने दोनों मामलों में FIR दर्ज कर ली है और तकनीकी जांच के आधार पर आरोपियों की तलाश की जा रही है।
पहला मामला: ‘आसान लोन’ के झांसे में फंसी महिला
एक महिला को घर बैठे लोन दिलाने का लालच देकर ठगों ने उसे अपना निशाना बनाया। ठगों ने पेशेवर तरीका अपनाते हुए न केवल डिजिटल बल्कि फिजिकल माध्यम से भी महिला को गुमराह किया।
- मोडस ऑपेरंडी: पोस्टर पर दिए नंबर के जरिए संपर्क होने पर आरोपी खुद महिला के घर पहुंचे और 7 लाख रुपए के लोन का झांसा दिया।
- धोखाधड़ी: प्रोसेसिंग फीस के नाम पर नकद राशि ऐंठने के बाद आरोपियों ने अलग-अलग बैंकों में महिला के खाते खुलवाए और खाली चेक पर हस्ताक्षर ले लिए।
- QR कोड से लूट: अंत में प्रक्रिया पूरी करने के बहाने महिला से 60 हजार रुपए क्यूआर कोड के जरिए ट्रांसफर करवा लिए गए। पैसे मिलते ही आरोपियों ने मोबाइल बंद कर दिया और महिला को ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया।
एक्शन: इस मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 3 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
दूसरा मामला: ‘बिजली मीटर अपडेट’ के नाम पर लिंक से ठगी
दूसरे मामले में एक युवक डिजिटल ठगी (फिशिंग) का शिकार हुआ। ठगों ने उसे बिजली कनेक्शन कटने का डर दिखाकर झांसे में लिया।
- मोडस ऑपेरंडी: आरोपी ने फोन कर बताया कि उसका बिजली मीटर अपडेट नहीं है। अपडेट न करने पर कनेक्शन काट दिया जाएगा।
- ₹13 का लालच और ₹80 हजार की चपत: ठग ने एक लिंक भेजकर मात्र 13 रुपए का भुगतान करने को कहा। जैसे ही युवक ने लिंक पर क्लिक किया, उसके दो अलग-अलग बैंक खातों से कुल 80 हजार रुपए साफ हो गए।
- जांच जारी: पुलिस साइबर सेल की मदद से उस लिंक और ट्रांजैक्शन आईडी को ट्रैक कर रही है जिससे पैसे ट्रांसफर किए गए हैं।
पुलिस की अपील: ‘सावधान रहें, सुरक्षित रहें’
दुर्ग पुलिस ने नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण चेतावनी जारी की है:
- अनजान लिंक: किसी भी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजे गए लिंक पर क्लिक न करें, चाहे वह बिजली बिल हो या बैंक केवाईसी।
- QR कोड: किसी से पैसे प्राप्त करने के लिए QR कोड स्कैन करने की आवश्यकता नहीं होती, यह केवल पैसे भेजने के लिए होता है।
- ऑफिशियल ऐप: बिजली बिल भुगतान या लोन संबंधी जानकारी के लिए संबंधित विभाग के आधिकारिक कार्यालय या एप का ही उपयोग करें।


