Bijapur Tendupatta Protest : बीजापुर जिले में तेंदूपत्ता संग्राहकों की समस्याओं को लेकर सियासत गरमा गई है। कांग्रेस के नेतृत्व में बड़ी संख्या में संग्राहकों ने शहर में रैली निकाली और धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का मुख्य विरोध ऑनलाइन भुगतान प्रणाली को लेकर है, जिसे अंदरूनी क्षेत्रों के आदिवासियों के लिए ‘मुसीबत’ बताया जा रहा है। प्रदर्शन के बाद मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर जल्द समाधान की मांग की गई।
नगद भुगतान की मांग क्यों?
कांग्रेस नेताओं और ग्रामीणों का तर्क है कि बीजापुर के अंदरूनी इलाकों में आज भी बैंकिंग नेटवर्क बेहद कमजोर है।
- दस्तावेजों का अभाव: कई आदिवासी परिवारों के पास बैंक खाते या आवश्यक केवाईसी (KYC) दस्तावेज नहीं हैं।
- दूरी की समस्या: बैंक जाने के लिए ग्रामीणों को मीलों का सफर तय करना पड़ता है, जिससे उनकी मजदूरी का नुकसान होता है।
- पलायन का खतरा: भुगतान में देरी और तकनीकी दिक्कतों के कारण ग्रामीण अब काम की तलाश में पड़ोसी राज्यों (तेलंगाना और आंध्र प्रदेश) की ओर पलायन करने को मजबूर हैं।
ज्ञापन में शामिल प्रमुख मांगें:
कांग्रेस द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में संग्राहकों के हित में निम्नलिखित बिंदुओं पर जोर दिया गया है:
- रेट में वृद्धि: तेंदूपत्ता की खरीदी दर ₹5500 से बढ़ाकर ₹7000 प्रति मानक बोरा की जाए।
- नगद भुगतान: संग्रहण केंद्रों पर ही ग्रामीणों को नगद राशि दी जाए।
- नए फड़ और मानदेय: संग्रहण के लिए नए फड़ खोले जाएं और फड़मुंशियों के मानदेय में बढ़ोतरी हो।
- अभ्यारण्य क्षेत्र: अभ्यारण्य क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासियों को भी संग्रहण की अनुमति दी जाए।
- मजदूरी दर: वर्तमान मजदूरी दर में महंगाई के अनुपात में वृद्धि की जाए।
सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप
प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि चुनाव के समय सरकार ने संग्राहकों से कई लुभावने वादे किए थे, लेकिन सत्ता में आने के बाद उन्हें ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही दर में वृद्धि और नगद भुगतान की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।


