सीजी भास्कर, 28 मई : रायपुर के विकास (CG PWD Infrastructure Reforms) के नाम पर हर साल होने वाले करोड़ों रुपये के खेल और जनता की गाढ़ी कमाई को सड़कों पर बहा देने वाली लचर व्यवस्था को लेकर आखिरकार शासन के गलियारों में एक बड़ा प्रशासनिक धमाका हुआ है। नवा रायपुर स्थित लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के मुख्यालय ‘निर्माण भवन’ में आयोजित एक हाई-प्रोफाइल बैठक में जो कुछ भी हुआ, उसने विभाग के भीतर चल रही पुरानी ढर्रे वाली कार्यप्रणाली की चूलें हिलाकर रख दी हैं।
लोक निर्माण विभाग के सचिव मुकेश कुमार बंसल ने रायपुर परिक्षेत्र के दोनों मंडलों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों की जमकर क्लास ली और साफ लहजे में चेतावनी दी कि अब “सड़क बनाओ और फिर खोद डालो” वाला पुराना खेल राज्य में नहीं चलेगा। इस कड़े रुख के बाद रायपुर की ब्यूरोक्रेसी में हड़कंप मच गया है, क्योंकि सचिव ने सीधे तौर पर कदम (CG PWD Infrastructure Reforms) की दिशा में उठाने का आदेश जारी कर दिया है।
दरअसल, यह बैठक केवल एक सामान्य विभागीय समीक्षा नहीं थी, बल्कि यह राजधानी रायपुर सहित पूरे परिक्षेत्र की सड़कों के भाग्य का फैसला करने वाली एक बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक मानी जा रही है। शहर के भीतर आज सबसे बड़ा सिरदर्द यह है कि पीडब्ल्यूडी सड़क बनाती है, उसके एक हफ्ते बाद ही कोई दूसरा विभाग आकर पाइपलाइन या केबल बिछाने के नाम पर उसे मलबे में तब्दील कर देता है।
जनता इस तमाशे को देखने और टैक्स भरने के लिए मजबूर है। इसी गंभीर और संवेदनशील मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए विभागीय सचिव ने अनुविभागीय अधिकारियों से लेकर प्रमुख अभियंता तक सबको तलब किया और स्पष्ट किया कि भविष्य में ऐसी किसी भी लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, जिसके कारण नुकसान (CG PWD Infrastructure Reforms) के मूल उद्देश्यों को ठेस पहुंचे।
‘खोदो और कमाओ’ वाले खेल पर सचिव का सबसे बड़ा प्रहार
बैठक के दौरान सबसे तीखा मोड़ तब आया जब सचिव मुकेश कुमार बंसल ने शहर के बीचों-बीच बनने वाली सड़कों की बार-बार होने वाली खुदाई पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि अब से पीडब्ल्यूडी जब भी शहर के भीतर कोई नई सड़क बनाएगी, तो उसे निर्माण कार्य शुरू करने से पहले ही संबंधित नगरीय निकाय (नगर निगम) के साथ अनिवार्य रूप से समन्वय स्थापित करना होगा।
उन्होंने निर्देश दिए कि सड़कों के निर्माण के दौरान ही नाली, अंडरग्राउंड केबल फिटिंग और पाइपलाइन जैसी भविष्य की जरूरतों के लिए पहले से ही पुख्ता प्रावधान किए जाएं। इस आदेश का सीधा मतलब यह है कि एक बार सड़क बनने के बाद कोई भी एजेंसी उसे दोबारा छू नहीं पाएगी। इस दूरगामी निर्णय को रायपुर की बदहाल यातायात व्यवस्था को सुधारने और बदलाव (CG PWD Infrastructure Reforms) को जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए एक बड़ा प्रशासनिक चाबुक माना जा रहा है।
अक्सर देखा गया है कि विभागों के बीच आपसी तालमेल न होने के कारण नई-नवेली चमचमाती सड़कें महज कुछ ही दिनों में कचरों के ढेर में बदल जाती हैं, जिससे न केवल शासकीय राशि का भारी दुरुपयोग होता है, बल्कि आम नागरिकों को भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। सचिव ने अधिकारियों को आईना दिखाते हुए कहा कि सरकारी खजाने का पैसा कोई फिजूलखर्ची के लिए नहीं है।
हर एक रुपये का पूरा सदुपयोग होना चाहिए और निर्माण कार्यों से ज्यादा से ज्यादा नागरिकों को लाभान्वित करने विभाग द्वारा किए जा रहे कार्यों की पूर्ण उपयोगिता (Functionality) व टिकाऊपन (Sustainability) हर हाल में सुनिश्चित की जानी चाहिए। अगर किसी भी सड़क पर दोबारा खुदाई की नौबत आई, तो इसके लिए सीधे तौर पर संबंधित क्षेत्र के कार्यपालन अभियंता और अनुविभागीय अधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी, जो कि नियम (CG PWD Infrastructure Reforms) के तहत अनुशासन का एक नया पैमाना है।
मंगलवार को ‘नो फील्ड विजिट
समीक्षा बैठक में केवल सड़कों की ही बात नहीं हुई, बल्कि प्रशासनिक कसावट लाने के लिए सचिव ने अधिकारियों के “लापता” रहने की आदत पर भी बड़ा प्रतिबंध लगा दिया है। उन्होंने एक नया और कड़ा फरमान जारी करते हुए कहा कि अनुविभागीय अधिकारियों (SDO) से लेकर खुद प्रमुख अभियंता (CE) तक सभी स्तर के अधिकारियों को प्रत्येक मंगलवार को अनिवार्य रूप से दिनभर अपने-अपने मुख्यालय में ही मौजूद रहना होगा। इस दिन कोई भी अधिकारी फील्ड विजिट या अन्य बहानों से अपने दफ्तर से गायब नहीं रह सकेगा। इस कड़े निर्देश के पीछे का सस्पेंस यह है कि आम जनता और जनप्रतिनिधियों को अपनी शिकायतों तथा विभागीय कार्यों के लिए अधिकारियों के चक्कर न काटने पड़ें। यह नया नियम सीधे तौर पर प्रशासनिक पारदर्शिता को बढ़ाने और गति (CG PWD Infrastructure Reforms) को गति देने के लिए लागू किया गया है।
इसके साथ ही, सचिव ने रायपुर और नवा रायपुर में विभागीय कार्यों में गति लाने और प्रशासनिक सहूलियत को बेहतर बनाने के लिए एक और बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने रायपुर मंडल क्रमांक-1 के अंतर्गत आने वाले चारों संभागों को पुनर्गठित करने के आदेश दिए हैं। अब इन क्षेत्रों के कार्यक्षेत्रों का नए सिरे से वैज्ञानिक और व्यावहारिक विभाजन किया जाएगा। इस पुनर्गठन का मुख्य उद्देश्य यह है कि किसी एक संभाग पर काम का अतिरिक्त बोझ न रहे और रायपुर की सभी सड़कों तथा भवनों की मॉनिटरिंग पूरी सक्रियता के साथ की जा सके। इस कदम से पीडब्ल्यूडी के भीतर वर्षों से जमी बैठी सुस्ती को तोड़ा जा सकेगा, जो शामिल (CG PWD Infrastructure Reforms) के एजेंडे में सबसे ऊपर शामिल था।
31 जुलाई तक चाहिए फाइनल प्राक्कलन
बैठक में केवल नसीहतें नहीं दी गईं, बल्कि काम का पूरा लेखा-जोखा और कड़े टाइमफ्रेम भी तय कर दिए गए हैं। विभागीय सचिव ने अधिकारियों को चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 और पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 में स्वीकृत किए गए सभी छोटे-बड़े कार्यों की एक स्पष्ट प्राथमिकता सूची (Priority List) तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इस सूची को तैयार कर हर हाल में 10 जून तक मुख्यालय भेजने का कड़ा अल्टीमेटम दिया गया है। इतना ही नहीं, इन सभी स्वीकृत और प्रस्तावित कार्यों के विस्तृत प्राक्कलन (Estimates) को भेजने की अंतिम तिथि 31 जुलाई निर्धारित की गई है। इस कड़े रुख से साफ है कि सरकार अब फाइलों को दबाकर बैठने वाले अफसरों को बख्शने के मूड में बिल्कुल नहीं है और प्रयास (CG PWD Infrastructure Reforms) को समय-सीमा के भीतर अमलीजामा पहनाना चाहती है।
सचिव ने साफ किया कि गुणवत्ता और समय-सीमा में काम पूरा करना इस सरकार की सबसे बड़ी और सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे अपने सुव्यवस्थित, पारदर्शी और समयबद्ध कार्यों के जरिए जनता और जनप्रतिनिधियों के बीच विभाग की एक नई और ईमानदार छवि स्थापित करें। जो ठेकेदार काम में देरी कर रहे हैं या घटिया निर्माण सामग्री का उपयोग कर रहे हैं, उन पर तुरंत कानूनी और वित्तीय कार्रवाई की जाए। परफार्मेंस गारंटी वाली सड़कों की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि जिन सड़कों की गारंटी अवधि बची हुई है और उनमें पैचवर्क या सुधार की जरूरत है, उन्हें संबंधित ठेकेदारों से बिना किसी अतिरिक्त सरकारी खर्च के तत्काल ठीक कराया जाए, ताकि बचत (CG PWD Infrastructure Reforms) के तहत सरकारी पैसे की पाई-पाई बचाई जा सके।
बरसात से पहले गड्डामुक्त सड़क बनाने की अग्निपरीक्षा
अब सबसे बड़ा सस्पेंस और चुनौती यह है कि छत्तीसगढ़ में मॉनसून की दस्तक बेहद करीब है और रायपुर परिक्षेत्र की अधिकांश सड़कों की हालत खस्ताहाल है। सचिव ने इस मुद्दे को भांपते हुए बैठक में मौजूद प्रमुख अभियंता वी.के. भतपहरी, मुख्य अभियंता पी.एम. कश्यप और टी.आर. कुंजाम को स्पष्ट निर्देश दिए कि बरसात शुरू होने से पहले ही युद्ध स्तर पर अभियान चलाकर सभी सड़कों की मरम्मत की जाए और उन्हें पूरी तरह से गड्डामुक्त (Pot-hole free) बनाया जाए। इसके साथ ही, उन्होंने रायपुर नगर निगम के अमले के साथ मिलकर सड़क के दोनों की नालियों की सघन सफाई कराने के निर्देश दिए हैं, ताकि भारी बारिश के दौरान सड़कों पर जलभराव न हो और डामर की सड़कें पानी के कारण समय से पहले खराब न हों।
सड़कों के साथ-साथ भवनों के निर्माण को लेकर भी सचिव ने कड़े मापदंड तय किए हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि जितने भी सरकारी भवनों का निर्माण हो रहा है, उनमें उच्च गुणवत्ता की पुट्टी, खिड़की, दरवाजे, टाइल्स, पेंट, सैनिटरी और इलेक्ट्रिक फिटिंग का ही उपयोग किया जाए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि सभी नए भवनों में दिव्यांगों की सहूलियत के लिए रैंप और रेलिंग का अनिवार्य प्रावधान होना चाहिए।
इसके अलावा, पीडब्ल्यूडी की संपत्तियों, पोल्स और डिवाइडर्स पर अवैध रूप से विज्ञापन, होर्डिंग, पोस्टर और फ्लेक्स लगाने वाले रसूखदारों के खिलाफ अब सीधे संपत्ति विरूपण अधिनियम के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है। देखना दिलचस्प होगा कि सचिव के इन कड़े तेवरों के बाद रायपुर की सड़कें इस बरसात में कितनी टिक पाती हैं और क्या वाकई बदलाव (CG PWD Infrastructure Reforms) की यह नई लहर छत्तीसगढ़ की राजधानी की तस्वीर और तकदीर बदल पाएगी।




