सीजी भास्कर, 15 अप्रैल : छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले से एक राहत भरी खबर सामने आई है, जहां सुरक्षा बलों (Jawan’s Promptness) की समय रहते की गई कार्रवाई ने एक बड़ी आपदा को टाल दिया। जिले के पीडिया इलाके में जंगल में लगी भीषण आग तेजी से रिहाइशी इलाके और संचार व्यवस्था की ओर बढ़ रही थी, जिसे जवानों की तत्परता और अदम्य साहस के बल पर काबू पा लिया गया। इस सूझबूझ भरी कार्रवाई से न केवल ग्रामीणों के घर सुरक्षित रहे, बल्कि इलाके की एकमात्र संचार सेवा (जियो टावर) को भी खाक होने से बचा लिया गया।
तीन टेकरियों में फैली आग, खतरे में आया गांव
प्राप्त जानकारी के अनुसार, घटना सोमवार, 12 अप्रैल 2026 की शाम की है। पीडिया सीआरपीएफ कैंप के पास स्थित सुदामेट्टा पहाड़ी की तीन अलग-अलग टेकरियों के जंगल में अचानक आग लग गई। गर्मियों के मौसम में सूखी पत्तियों और तेज हवा के कारण आग ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि वे पहाड़ी के नीचे स्थित आसपास के गांवों की ओर बढ़ने लगीं। इसके साथ ही, इलाके में हाल ही में स्थापित किया गया जियो (Jio) मोबाइल टावर भी आग की सीधी जद में आ गया। यदि आग वहां तक पहुंचती, तो पूरा इलाका संचार विहीन हो जाता।
अंधेरी रात में रेस्क्यू ऑपरेशन
जंगल में आग और उससे उत्पन्न खतरे की सूचना मिलते ही पीडिया कैंप में तैनात सीआरपीएफ की 199वीं वाहिनी की बी (B) कंपनी हरकत में आई। यहां जवानों की तत्परता (Jawan’s Promptness) देखने लायक थी। कैंप कमांडर राजीव कुमार और कंपनी कमांडर व सहायक कमांडेंट अक्षय झा ने स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए त्वरित कार्रवाई का निर्णय लिया।
चूंकि इलाका संवेदनशील था और रात का समय था, इसलिए किसी बाहरी दमकल सेवा या सहायता का इंतजार करना मुमकिन नहीं था। जवानों ने बिना किसी बाहरी सहायता के उपलब्ध संसाधनों पानी, मिट्टी, और कैंप में मौजूद अग्निशमन यंत्रों का उपयोग करते हुए आग से मोर्चा ले लिया।
मुश्किलों भरा संघर्ष और हल्की चोटें
यह रेस्क्यू ऑपरेशन बेहद चुनौतीपूर्ण था। चारों तरफ धुआं, आग की गर्मी, अफरा-तफरी का माहौल और ऊपर से अंधेरी रात। उबड़-खाबड़ पहाड़ी रास्ते पर आग बुझाते समय कई जवानों को हल्की चोटें भी आईं, लेकिन उनका हौसला नहीं डिगा। जवानों ने पूरी रात कड़ी मेहनत की। अंततः, मंगलवार सुबह लगभग 4 बजे तक जवानों ने आग पर पूरी तरह काबू पा लिया और उसे गांव तथा मोबाइल टावर तक पहुंचने से पहले ही रोक दिया।
दोबारा भड़की आग, फिर दिखाया दम
खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं था। अगले दिन, 13 अप्रैल की दोपहर लगभग 1 बजे, तेज धूप और हवा के कारण आग की चिंगारियां फिर से सुलग उठीं और आग दोबारा तेज हो गई। लेकिन पीडिया कैंप में मौजूद बहादुर जवानों ने एक बार फिर जवानों की तत्परता (Jawan’s Promptness) का परिचय दिया। उन्होंने तुरंत मोर्चा संभाला और कुछ ही समय में दोबारा भड़की आग पर पूरी तरह काबू पा लिया।
वरिष्ठ अधिकारियों का मार्गदर्शन और कुशल नेतृत्व
इस सफल ऑपरेशन के पीछे न केवल मैदान में डटे जवानों का साहस था, बल्कि उनके वरिष्ठ अधिकारियों का कुशल मार्गदर्शन भी था। 199वीं वाहिनी की बी कंपनी के जवानों ने यह पूरी कार्रवाई कमांडेंट आनंद कुमार और द्वितीय कमान अधिकारी विनोद कुमार के दिशा-निर्देशों में अंज़ाम दी। वहीं, मौके पर कैंप कमांडर राजीव कुमार और कंपनी कमांडर अक्षय झा के नेतृत्व में जवानों ने रणनीतिक रूप से आग को घेरा।
उनकी इस सूझबूझ ने न सिर्फ आग को अपने कैंप की तरफ आने से रोका, बल्कि इन पहाड़ियों के आसपास स्थित गांवों के मासूम ग्रामीणों और करोड़ों की लागत से बने मोबाइल टावर को भी आग के हवाले होने से बचा लिया।
ग्रामीणों ने जताया आभार
नक्सलवाद के साये में जीने वाले इस इलाके के ग्रामीणों के लिए यह आग एक दोहरी मुसीबत थी। घर जलने के खतरे के साथ-साथ संचार सेवा ठप होने का डर भी था। जवानों द्वारा जान जोखिम में डालकर की गई इस कार्रवाई की ग्रामीणों ने प्रशंसा की है। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सुरक्षा बल न केवल बाहरी दुश्मनों से देश की रक्षा करते हैं, बल्कि प्राकृतिक आपदाओं और स्थानीय समस्याओं के समय भी देशवासियों के लिए ढाल बनकर खड़े रहते हैं।


