सीजी भास्कर, 18 अप्रैल। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिला न्यायालय स्थित मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण में फर्जी बीमा क्लेम का मामला सामने आया है। जशपुर जिले के बगीचा क्षेत्र की महिला के नाम से कोर्ट में मुआवजे का दावा पेश किया गया था। (Insurance claim fraud)
हालांकि महिला खुद कोर्ट में पहुंचकर बताया कि उसने न तो कोई मामला दायर किया है और न ही किसी वकील को वकालतनामा दिया है। इसके बाद कोर्ट के आदेश पर सिविल लाइन पुलिस ने एक ग्रामीण, पांच वकीलों और एक नोटरी के खिलाफ धोखाधड़ी और कूटरचना का मामला दर्ज किया है। (Insurance claim fraud)
दरअसल कोर्ट में ‘प्रेमिका कुजूर बनाम मुरली यादव’ के नाम से क्षतिपूर्ति का दावा पेश किया गया था। 13 मार्च को जब आवेदिका प्रेमिका कुजूर का बयान लिया गया तो उसने साफ इनकार कर दिया। उसने कोर्ट को बताया कि उसने किसी भी दस्तावेज पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं और न ही कोई दावा पेश किया है।
जांच में सामने आया फर्जीवाड़ा : Insurance claim fraud
प्राथमिक जांच में यह बात सामने आई कि भोले-भाले ग्रामीणों के नाम का इस्तेमाल कर फर्जी तरीके से मुआवजा लेने की कोशिश की गई। कोर्ट के संज्ञान में मामला आने के बाद इसे गंभीर धोखाधड़ी मानते हुए कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
इसके बाद कोर्ट के प्रस्तुतकार जानेन्द्र दुबे ने पूरे मामले की शिकायत की, जिस पर सिविल लाइन पुलिस ने जशपुर निवासी जोनी कुजूर, अधिवक्ता एनपी चंद्रवंशी, भगवती कश्यप, शुभम चंद्रवंशी और सूरज कुमार के खिलाफ केस दर्ज किया है।
बिना मौजूदगी के शपथ पत्र प्रमाणित : Insurance claim fraud
जांच में यह भी सामने आया कि आवेदकों की मौजूदगी के बिना ही शपथ पत्रों का नोटरी प्रमाणीकरण कर दिया गया। कोर्ट ने इसे गंभीर मामला मानते हुए कहा कि यह न्यायिक प्रक्रिया में झूठा साक्ष्य गढ़ने और आपराधिक साजिश का मामला है।
मामले में नोटरी अधिवक्ता संतोष कुमार यादव के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की गई है। (Insurance claim fraud)




