सीजी भास्कर, 12 जून। दंतेवाड़ा जिले के आलनार स्थित लौह अयस्क खदान को लेकर विवाद अब सड़क से प्रशासनिक दफ्तरों तक पहुंच गया है। एक ओर खदान संचालित करने वाली आरती स्पंज कंपनी पर बिना वास्तविक खनन और परिवहन के लाखों टन लौह अयस्क के उत्पादन और परिवहन दिखाने के आरोप लग रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रभावित ग्रामीणों और आदिवासी संगठनों ने कंपनी की लीज निरस्त करने की मांग को लेकर बड़ा आंदोलन शुरू कर दिया है। (Aarti Sponge Mining Controversy Dantewada)
पूर्व MLA मनीष कुंजाम के नेतृत्व में गुरुवार को सैकड़ों आदिवासी ग्रामीण 55 किलोमीटर पैदल यात्रा कर दंतेवाड़ा कलेक्ट्रेट पहुंचे और राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपते हुए मामले की निष्पक्ष जांच और खदान की लीज रद्द करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि जिस क्षेत्र से कंपनी ने करीब 2.75 लाख टन लौह अयस्क के उत्पादन और परिवहन का दावा किया है, वहां तक पहुंचने के लिए पर्याप्त सड़क तक नहीं है।
परिवहन दस्तावेजों पर उठे सवाल : Aarti Sponge Mining Controversy Dantewada
मनीष कुंजाम का आरोप है कि हाल ही में सामने आए दस्तावेजों में कंपनी ने पिछले साल में 2.75 लाख टन लौह अयस्क के खनन और परिवहन का दावा किया है। लेकिन स्थानीय लोगों और कुछ वाहन मालिकों का कहना है कि जिन वाहनों और ड्राइवरों के नाम परिवहन रिकॉर्ड में दर्ज हैं, उनमें से कई लोगों को इस परिवहन की जानकारी तक नहीं है। इससे दस्तावेजों की प्रामाणिकता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि खदान क्षेत्र में न तो बड़े पैमाने पर खनन के स्पष्ट निशान दिखाई देते हैं और न ही भारी वाहनों की नियमित आवाजाही के प्रमाण मिलते हैं। ऐसे में लाखों टन लौह अयस्क के उत्पादन और परिवहन के दावों की स्वतंत्र जांच जरूरी है।
डंपिंग यार्ड भी जांच के घेरे में
विवाद केवल परिवहन रिकॉर्ड तक सीमित नहीं है। आंदोलनकारी और स्थानीय ग्रामीण कंपनी के डंपिंग यार्ड को लेकर भी सवाल उठा रहे हैं। उनका दावा है कि यार्ड में पड़ा लौह अयस्क का चूरा सालों पुराना है। उसकी गुणवत्ता भी खदान क्षेत्र में मिलने वाले अयस्क से अलग बताई जा रही है। इससे संदेह है कि दस्तावेजों में दर्ज जानकारी और जमीनी स्थिति एक-दूसरे से मेल नहीं खा रहीं।
प्रशासन और वन विभाग ने शुरू की जांच
मामले के तूल पकड़ने के बाद प्रशासन ने जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है। कलेक्टर देवेश ध्रुव का कहना है कि मामले की जांच के लिए समिति गठित की गई है, जिसमें खनिज और राजस्व विभाग के अधिकारी शामिल हैं। दूसरी ओर वन विभाग ने भी अलग से टीम बनाकर पूरे प्रकरण की जांच शुरू कर दी है।
बस्तर में बड़ा मुद्दा बनने की ओर : Aarti Sponge Mining Controversy Dantewada
आलनार खदान का मामला अब केवल एक खनन परियोजना का विवाद नहीं रह गया है। लाखों टन लौह अयस्क के परिवहन, दस्तावेजों की सत्यता, पर्यावरणीय प्रभाव और आदिवासी अधिकारों जैसे मुद्दों के जुड़ने से यह मामला बस्तर संभाग के सबसे चर्चित जनआंदोलनों में शामिल होता जा रहा है।
आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट और आंदोलन की दिशा इस विवाद की तस्वीर और साफ कर सकती है। इस मामले में हमने आरती स्पंज प्रबंधन से भी बातचीत कर उनका पक्ष जानने की कोशिश की लेकिन बात नहीं हो सकी।



