सीजी भास्कर, 03 मई : छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर में अनुशासनहीनता और भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रशासन (Administrative Action Bilaspur) ने कड़ा रुख अपनाया है। जिले में दो अलग-अलग मामलों में बड़ी कार्रवाई करते हुए एक पुलिस आरक्षक और नगर निगम के वरिष्ठ स्वच्छता निरीक्षक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इस कार्रवाई के बाद से प्रशासनिक महकमों में हड़कंप मचा हुआ है।
थाना परिसर में भाई पर तानी बंदूक
पहली घटना (Administrative Action Bilaspur) सिविल लाइन थाने की है, जिसने खाकी की छवि पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मिली जानकारी के अनुसार, आरक्षक विष्णु चंद्रा का अपने ही बड़े भाई के साथ आपसी विवाद चल रहा था। विवाद इतना बढ़ा कि बड़ा भाई अपनी शिकायत दर्ज कराने थाने पहुँच गया। इसी दौरान आरक्षक विष्णु चंद्रा ने आपा खो दिया और थाना परिसर के भीतर ही अपने सगे भाई पर बंदूक तान दी। इतना ही नहीं, उसने सरेआम जान से मारने की धमकी भी दी।
पुलिस विभाग में इस तरह की अनुशासनहीनता को देखते हुए एसएसपी रजनेश सिंह ने इसे बेहद गंभीरता से लिया। उन्होंने तत्काल आरक्षक को निलंबित कर दिया। एसएसपी ने स्पष्ट किया है कि वर्दी पहनकर कानून को हाथ में लेने वालों पर कोई नरमी नहीं बरती जाएगी और मामले की विस्तृत विभागीय जांच के आदेश भी दे दिए गए हैं।
वसूली और अभद्रता के आरोप में सस्पेंड
दूसरी कार्रवाई नगर पालिक निगम बिलासपुर (Administrative Action Bilaspur) में हुई है। यहाa स्वच्छता पेट्रोलिंग टीम के प्रभारी और वरिष्ठ स्वच्छता निरीक्षक दीपक कुमार पंकज पर गाज गिरी है। उन पर दुकानदारों से बिना रसीद के अवैध रूप से जुर्माना वसूलने, उनके साथ गाली-गलौज और अभद्र व्यवहार करने के गंभीर आरोप लगे थे। इसके अलावा उन पर बिना पैसे दिए सामान लेने की शिकायतें भी प्राप्त हुई थीं।
इस मामले में दुकानदार ने नगर निगम को सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध कराया था, जिसमें प्रभारी की संदिग्ध गतिविधियाँ कैद थीं। निगम कमिश्नर प्रकाश कुमार सर्वे ने साक्ष्यों के आधार पर इसे सिविल सेवा नियमों का उल्लंघन माना और अधिकारी को सस्पेंड कर दिया। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय स्वास्थ्य विभाग (पं. देवकीनंदन दीक्षित औषधालय) तय किया गया है।
प्रशासनिक साख पर उठे सवाल
इन दोनों मामलों ने बिलासपुर में सरकारी तंत्र की कार्यशैली और अनुशासन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां एक ओर आरक्षक ने मर्यादा की सीमाएं लांघी, वहीं दूसरी ओर स्वच्छता प्रभारी के कृत्य से नगर निगम की छवि धूमिल हुई है। हालांकि, प्रशासन की इस त्वरित कार्रवाई की आम जनता सराहना कर रही है।
इस पूरे घटनाक्रम में एक और पहलू चर्चा का विषय बना हुआ है। बताया जा रहा है कि इसी प्रकरण में मेयर पति के खिलाफ भी अभद्रता की शिकायत दर्ज कराई गई थी, लेकिन उन पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इसे लेकर शहर में प्रशासनिक निष्पक्षता पर भी चर्चाएं तेज हैं। फिलहाल, इन दोनों निलंबन आदेशों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कर्तव्यों में लापरवाही और अनुशासनहीनता किसी भी स्तर पर स्वीकार्य नहीं होगी।


