Amit Shah Naxal Review Meeting: केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह शनिवार शाम रायपुर पहुंचे, जहां एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, गृह मंत्री विजय शर्मा और संगठन के वरिष्ठ नेताओं ने उनका स्वागत किया। पिछले दो महीनों में यह उनका दूसरा छत्तीसगढ़ दौरा है, जिसे नक्सलवाद के खिलाफ चल रही रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
मेफेयर होटल में होगी अहम रणनीतिक चर्चा
तय कार्यक्रम के अनुसार, Amit Shah Naxal Review Meeting रविवार को रायपुर स्थित मेफेयर होटल में आयोजित की जा रही है। बैठक में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की वर्तमान स्थिति, सुरक्षा व्यवस्था और फील्ड से मिले ताजा इंटेलिजेंस इनपुट्स की विस्तार से समीक्षा की जाएगी। इसे (security strategy review) के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
तय समयसीमा के करीब पहुंचा नक्सल उन्मूलन अभियान
यह बैठक ऐसे समय में हो रही है, जब केंद्र सरकार द्वारा तय की गई नक्सलवाद समाप्त करने की समयसीमा तेजी से नजदीक आ रही है। 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद के पूर्ण खात्मे का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें अब सीमित समय शेष है। इसी को ध्यान में रखते हुए (anti-naxal operations) की रफ्तार बढ़ाई गई है।
छत्तीसगढ़ सहित कई इलाकों में तेज हुए अभियान
पिछले कुछ हफ्तों में छत्तीसगढ़ और अन्य नक्सल प्रभावित राज्यों में सुरक्षा बलों द्वारा लगातार सर्च ऑपरेशन और एरिया डोमिनेशन अभियान चलाए गए हैं। बैठक में इन अभियानों की प्रगति रिपोर्ट, चुनौतियां और आगे की कार्ययोजना पर गहन चर्चा होने की संभावना है।
बस्तर पंडुम समापन में भी होंगे शामिल
रायपुर बैठक के बाद केंद्रीय गृहमंत्री बस्तर में आयोजित पंडुम महोत्सव के समापन कार्यक्रम में भी शिरकत करेंगे। इससे पहले भी वे कई बार बस्तर और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर चुके हैं, जहां जमीनी हालात का सीधा फीडबैक लिया गया था।
सुरक्षा एजेंसियों के शीर्ष अधिकारी रहेंगे मौजूद
बैठक में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों, राज्य पुलिस, खुफिया एजेंसियों और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। माना जा रहा है कि समीक्षा के बाद नक्सल प्रभावित इलाकों में अभियानों को और तेज करने से जुड़े अहम फैसले लिए जा सकते हैं, जो (final phase counter insurgency) की दिशा तय करेंगे।
अंतिम रणनीति की ओर बढ़ता अभियान
कुल मिलाकर, यह दौरा और बैठक नक्सलवाद के खिलाफ अंतिम चरण की रणनीति को आकार देने की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है। आने वाले महीनों में इसके असर जमीनी स्तर पर स्पष्ट रूप से देखने को मिल सकते हैं।




