सीजी भास्कर, 3 जून। भारतीय रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। भारतीय सेना के लिए अत्याधुनिक रोबोटिक तकनीक से आर्टिलरी शेल तैयार किए जाएंगे। इसके लिए एक भारतीय कंपनी को 30,000 स्वदेशी 152 मिमी आर्टिलरी गोलों की आपूर्ति का बड़ा अनुबंध मिला है। इन गोलों की आपूर्ति जून 2026 से शुरू होने की संभावना है। (Artillery shell manufacturing using robotic technology)
पूरी तरह स्वचालित तकनीक से होगा निर्माण : Artillery shell manufacturing using robotic technology
आर्टिलरी गोलों का निर्माण कर्नाटक के बेलगावी स्थित अत्याधुनिक ग्रीनफील्ड संयंत्र में किया जाएगा। यह उत्पादन इकाई पूरी तरह स्वचालित होगी, जहां रोबोटिक तकनीक के माध्यम से निर्माण प्रक्रिया संचालित की जाएगी। इस तकनीक से उत्पादन में सटीकता, गुणवत्ता और गति सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
बढ़ती जरूरतों को ध्यान में रखकर विस्तार की तैयारी
प्रारंभिक चरण में 30,000 गोलों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है, लेकिन भविष्य में एक लाख से अधिक उन्नत आर्टिलरी शेल तैयार करने की योजना है। इसका उद्देश्य भारतीय सेना को संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों में उच्च क्षमता वाले गोला-बारूद की निरंतर और विश्वसनीय आपूर्ति उपलब्ध कराना है।
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को मिलेगा नया आयाम : Artillery shell manufacturing using robotic technology
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल देश को रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में और अधिक आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों के अनुरूप निर्माण और आधुनिक उत्पादन प्रणाली के जरिए भारत वैश्विक रक्षा आपूर्ति श्रृंखला में अपनी स्थिति को और मजबूत कर सकता है। यह कदम रक्षा क्षेत्र में तकनीकी नवाचार और स्वदेशी क्षमताओं के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।



