सीजी भास्कर, 10 सितंबर : नगरीय निकायों की व्यवस्था (Arun Sao Urban Body Review) को लेकर उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि निगम आयुक्त और मुख्य नगर पालिका अधिकारी रोज सुबह शहर में निकलें, सफाई और निर्माण कार्यों की जमीनी स्थिति देखें और मौके पर ही जरूरी कार्रवाई कराएं। उन्होंने निकायों को केवल बजट खर्च करने वाली संस्था नहीं, बल्कि शहर के भविष्य की योजना बनाने और नागरिकों को बेहतर सुविधाएं देने वाली संस्था के रूप में काम करने को कहा।
सुबह मैदान में उतरें अधिकारी
नवा रायपुर स्थित विश्राम भवन में आयोजित समीक्षा बैठक में उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव ने राज्य के सभी नगर निगमों और जिला मुख्यालय वाले नगर पालिकाओं के कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने स्वच्छता, राजस्व वसूली, निर्माण कार्यों और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने के निर्देश दिए।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि नगरीय निकायों की कार्यप्रणाली (Arun Sao Urban Body Review) ऐसी होनी चाहिए, जिससे योजनाओं का असर केवल कागजों में नहीं, बल्कि धरातल पर दिखाई दे। निर्माणाधीन कार्यों का नियमित निरीक्षण करने और गुणवत्ता से किसी तरह का समझौता नहीं करने के निर्देश भी दिए गए।
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अतिक्रमण पर तत्काल कार्रवाई
उप मुख्यमंत्री ने अवैध कब्जों और अतिक्रमण का पता चलते ही कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अवैध निर्माण पर समय रहते कार्रवाई नहीं होने से भविष्य में सड़क, पानी, बिजली और दूसरी नागरिक सुविधाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
उन्होंने निगम आयुक्तों और सीएमओ को प्रतिदिन मॉर्निंग विजिट करने को कहा, ताकि शहर की सफाई व्यवस्था, निर्माण कार्य और नागरिक समस्याओं की वास्तविक स्थिति सामने आ सके। इससे अधिकारियों को लोगों से सीधे फीडबैक लेने और स्थानीय समस्याओं का समय पर समाधान करने में भी मदद मिलेगी।
संपत्ति कर ऑनलाइन होगा
निकायों की आय बढ़ाने के लिए संपत्तियों का सर्वे कर नई संपत्तियों की पहचान करने के निर्देश दिए गए। साथ ही संपत्ति कर भुगतान की ऑनलाइन सुविधा ज्यादा से ज्यादा नगरीय निकायों में उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया।
प्रधानमंत्री आवास योजना और पीएम स्वनिधि योजना का लाभ अधिक से अधिक पात्र लोगों तक पहुंचाने के निर्देश भी दिए गए। अधिकारियों को राजस्व वसूली, निर्माण कार्यों, साफ-सफाई और योजनाओं की प्रगति की अलग-अलग दिनों में नियमित समीक्षा के लिए प्रभावी कार्यपद्धति विकसित करने को कहा गया।
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50 साल की जल जरूरतों पर फोकस
अरुण साव ने नगरीय निकायों को अगले 50 वर्षों की जल आवश्यकता को ध्यान में रखकर चिंतन शिविर आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन और उपयोग किए गए पानी के पुनः उपयोग की व्यापक कार्ययोजना तैयार करने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि भविष्य के जल संकट से बचने के लिए अभी से दीर्घकालिक रणनीति बनाना जरूरी है। शहरों के सभी घरों में पेयजल की पुख्ता व्यवस्था के साथ रेन वाटर हार्वेस्टिंग और जल पुनः उपयोग को भी प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए।
खाली जमीन पर बनेंगे अर्बन फॉरेस्ट
नगरीय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने अधिकारियों से कहा कि शहरों में उपलब्ध खाली स्थानों की पहचान कर वहां सघन वृक्षारोपण कराया जाए। जरूरत के अनुसार अर्बन फॉरेस्ट विकसित करने और फुटपाथों को अतिक्रमणमुक्त रखने के निर्देश भी दिए गए।
उन्होंने कहा कि शहरवासियों को निकाय की मौजूदगी का अहसास होना चाहिए। योजनाओं और विकास कार्यों का प्रभाव जमीन पर दिखाई देना चाहिए। साथ ही नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के निर्देशों का गंभीरता से पालन करने और सामान्य सभा व एमआईसी की बैठकें समय पर कराने को कहा।
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नालंदा परिसरों को जल्द शुरू करने पर जोर
समीक्षा बैठक में निर्माणाधीन नालंदा परिसरों को जल्द शुरू करने के लिए जरूरी व्यवस्थाएं पूरी करने पर भी जोर दिया गया। फर्नीचर, आईटी सुविधाओं, किताबों और अन्य आवश्यक संसाधनों के लिए राशि स्वीकृत कर जल्द टेंडर जारी करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री की घोषणाओं, अधोसंरचना कार्यों, मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, 15वें वित्त आयोग, स्वच्छ भारत मिशन, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, अमृत मिशन, जल आवर्धन योजनाओं और पीएम ई-बस समेत विभिन्न योजनाओं की समीक्षा की गई।
राजस्व से लेकर हेल्पलाइन तक समीक्षा
उप मुख्यमंत्री ने राजस्व वसूली, वेतन भुगतान, एनर्जी बिल ऑडिट, एबीसी रूल्स, गोधाम योजना, सीएम हेल्पलाइन और लोक सेवा गारंटी की प्रगति की भी जानकारी ली। निकायों की टीम द्वारा प्रतिदिन मॉर्निंग विजिट और रेन वाटर हार्वेस्टिंग कार्यों की स्थिति की भी समीक्षा की गई।
उन्होंने कहा कि शहरी विकास की समीक्षा (Arun Sao Urban Body Review) केवल योजनाओं की प्रगति जानने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसका उद्देश्य नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना और शहरों को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार करना होना चाहिए।
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