सीजी भास्कर 17 जनवरी। राजनीतिक हलकों में जब अचानक बैठकों का दौर तेज हो जाए, तो संकेत साफ (Assam Election Strategy) होते हैं कि किसी बड़े फैसले की जमीन तैयार हो रही है। हाल के घटनाक्रमों ने भी यही आभास दिया है कि आने वाले चुनाव को लेकर विपक्ष अब केवल बयानबाजी नहीं, बल्कि ठोस रणनीति के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर चुका है।
यह सियासी मंथन नई दिल्ली में हुआ, जहां असम विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस की एक अहम बैठक आयोजित की गई। बैठक में पार्टी के वरिष्ठ नेता, संगठन से जुड़े पदाधिकारी और चुनावी जिम्मेदारी संभालने वाले नेताओं ने हिस्सा लिया। इस दौरान जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं की भूमिका और चुनावी मुद्दों पर गहन चर्चा की गई।
बैठक में शामिल छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और असम के लिए नियुक्त ऑब्जर्वर भूपेश बघेल ने साफ शब्दों में कहा कि पार्टी का हर कार्यकर्ता पूरी ताकत के साथ चुनावी मैदान (Assam Election Strategy) में उतरेगा। उन्होंने संकेत दिए कि असम में मौजूदा सत्ता व्यवस्था के खिलाफ व्यापक जनसमर्थन तैयार किया जा रहा है और संगठनात्मक स्तर पर कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी।
कांग्रेस नेतृत्व की मौजूदगी में हुई इस बैठक को चुनावी दृष्टि से निर्णायक माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, आगामी महीनों के लिए बूथ स्तर तक की कार्ययोजना, जनसंपर्क अभियान और मुद्दा आधारित राजनीति पर सहमति बनी है। पार्टी का फोकस स्थानीय समस्याओं, रोजगार, सामाजिक संतुलन और प्रशासनिक जवाबदेही जैसे विषयों पर केंद्रित रहने वाला है।
भूपेश बघेल ने बैठक के बाद संकेत दिए कि असम में राजनीतिक मुकाबला सीधा और स्पष्ट होगा। उनका कहना था कि पार्टी कार्यकर्ता पूरी तैयारी के साथ मैदान में हैं और जनता के बीच जाकर मौजूदा (Assam Election Strategy) शासन की नीतियों पर सवाल उठाए जाएंगे। उन्होंने इसे संगठन की सामूहिक लड़ाई बताया, जिसमें नेतृत्व और कार्यकर्ता एकजुट नजर आएंगे।
कुल मिलाकर, दिल्ली में हुई यह बैठक केवल चर्चा तक सीमित नहीं रही, बल्कि इससे यह संदेश भी गया कि असम विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस अब आक्रामक और सुनियोजित रणनीति के साथ आगे बढ़ रही है। आने वाले दिनों में इसका असर ज़मीनी राजनीति में भी साफ दिखाई देने की संभावना है।




