सीजी भास्कर, 21 फरवरी। अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय ने पिछले कुछ वर्षों में शैक्षणिक और अधोसंरचनात्मक विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति (Atal Bihari Vajpayee University MoU) दर्ज की है। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा आयोजित प्रेस वार्ता में कुलपति आचार्य प्रो. अरुण दिवाकर नाथ बाजपेयी ने अपने कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धियों और आगामी योजनाओं की जानकारी साझा करते हुए बताया कि इस अवधि में विश्वविद्यालय ने 57 राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) किए हैं और पांच शोधपीठों की स्थापना की गई है।
उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय ने अकादमिक विस्तार को प्राथमिकता देते हुए 21 नए विभागों के गठन का प्रस्ताव शासन को भेजा है। इन पहलों का उद्देश्य छात्रों को बेहतर शैक्षणिक अवसर प्रदान करना और अनुसंधान गतिविधियों को बढ़ावा देना है। कुलपति का कार्यकाल 22 फरवरी 2026 को पूर्ण हो रहा है और इस दौरान संस्थान ने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं।
कार्यपरिषद की बैठक में आगामी शैक्षणिक सत्र 2027–28 के लिए बजट प्रस्ताव पर भी चर्चा (Atal Bihari Vajpayee University MoU) की गई। प्रस्तावित बजट के अनुसार विश्वविद्यालय की अनुमानित आय ₹54 करोड़ और व्यय ₹63 करोड़ रहेगा, जिससे ₹9 करोड़ का संभावित घाटा अनुमानित है। कुलपति ने स्पष्ट किया कि यह घाटा विकास और शैक्षणिक गुणवत्ता सुधार के लिए किए जा रहे निवेश का परिणाम है।
विश्वविद्यालय के नए परिसर में स्थानांतरण के बाद अधोसंरचना विकास को गति मिली है। वर्तमान में छात्रावास, भवन निर्माण और अन्य सुविधाओं सहित लगभग ₹100 करोड़ के विभिन्न विकास कार्य प्रगति पर हैं। इसके अलावा प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान (PM-USHA) के तहत ₹20 करोड़ की सहायता प्राप्त हुई है, जिससे शैक्षणिक और भौतिक संसाधनों को मजबूत किया जा रहा है।
विश्वविद्यालय की संचित निधि में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जो पहले ₹2 करोड़ थी और अब बढ़कर ₹10 करोड़ हो गई है। शिक्षण गुणवत्ता सुधारने के लिए नए संकाय सदस्यों की नियुक्ति की गई है और अनुसंधान को प्रोत्साहित करने के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
इसी क्रम में 21 और 22 फरवरी को विश्वविद्यालय में कुलपति सम्मेलन आयोजित किया (Atal Bihari Vajpayee University MoU) जा रहा है, जिसमें देशभर के 41 कुलपति शामिल होंगे। इस सम्मेलन में नई शिक्षा नीति, शोध और नवाचार, डिजिटल शिक्षा, उद्योग और शिक्षण संस्थानों के बीच सहयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होगी।
विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इन पहलों से उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नए अवसर खुलेंगे और संस्थान राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान को और मजबूत करेगा।






