सीजी भास्कर, 01 मई : प्रकृति प्रेमियों (Barnawapara Wildlife) का मानना है कि प्रकृति कभी अपना ऋण नहीं भूलती. छत्तीसगढ़ की पावन धरा, जो अपनी नैसर्गिक संपदा के लिए विख्यात रही है, आज वन्यजीव संरक्षण के स्वर्णिम युग की ओर बढ़ रही है. बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के बारनवापारा वन्यजीव अभ्यारण्य में काले हिरणों (ब्लैकबक) का सफलतापूर्वक पुनरुद्धार हुआ है, जहां इनकी संख्या अब 200 के करीब पहुंच गई है.

1970 के दशक में विलुप्त हो चुके इन हिरणों को 2018 की पुनरुद्धार योजना और 2026 तक के वैज्ञानिक प्रयासों से वापस लाया गया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने “मन की बात” में इस सफल वापसी का उल्लेख कर इसे पर्यावरण मानचित्र पर एक नया अध्याय बना दिया है.
विजन भरा नेतृत्व और प्रतिबद्धता

इस उपलब्धि के सूत्रधार मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय हैं. उन्होंने इस सफलता को राज्य की जैव विविधता और पर्यावरण के प्रति सरकार की अटूट प्रतिबद्धता का प्रतिफल बताया है. मुख्यमंत्री का मानना है कि प्रधानमंत्री की सराहना वन विभाग और स्थानीय समुदायों के कठिन परिश्रम पर लगी राष्ट्रीय मुहर है. छत्तीसगढ़ आज विकास और पारिस्थितिकी तंत्र के बीच उस दुर्लभ संतुलन को साध रहा है, जिसकी वैश्विक आवश्यकता है.
वैज्ञानिक रणनीति: विलुप्ति से पुनर्वास तक
बारनवापारा (Barnawapara Wildlife) में काले हिरणों का दिखाई देना एक समय दुर्लभ हो गया था. वन मंत्री केदार कश्यप और प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) अरुण कुमार पाण्डेय के निर्देशन में इस लक्ष्य को वास्तविकता में बदला गया. फरवरी 2026 में विशेषज्ञों की निगरानी में 30 काले हिरणों को ‘सॉफ्ट रिलीज’ पद्धति से मुक्त किया गया. ब्लैकबक कंजर्वेशन सेंटर में बेहतर पोषण और वैज्ञानिक देखभाल से इनकी संख्या में निरंतर वृद्धि हुई है.
प्रशासनिक इच्छाशक्ति और मैदानी संघर्ष
इस अभियान के पीछे उन अधिकारियों और मैदानी अमले की मेहनत है, जिन्होंने दिन-रात एक कर दिया. मुख्य वन संरक्षक (रायपुर) सतोविशा समाजदार और वनमंडलाधिकारी (बलौदाबाजार) धम्मशील गणवीर के नेतृत्व में फील्ड स्टाफ और जीव वैज्ञानिकों की टीम ने ढाल की तरह काम किया. वर्तमान में इनकी सुरक्षा के लिए हाई-टेक निगरानी प्रणाली, जीपीएस ट्रैकिंग और नियमित पेट्रोलिंग का उपयोग किया जा रहा है.
सुरक्षित भविष्य का आधार
बारनवापारा (Barnawapara Wildlife) का यह माडल देश के लिए एक ‘केस स्टडी’ बन सकता है. यहाँ केवल प्रजाति का पुनर्वास नहीं हुआ, बल्कि उनके लिए संपूर्ण आवास तंत्र विकसित किया गया. रामपुर ग्रासलैंड का वैज्ञानिक प्रबंधन, जल स्रोतों का जीर्णोद्धार और स्थानीय घास का संवर्धन मुख्य कारक रहे. काला हिरण भारतीय उपमहाद्वीप का संकटग्रस्त मृग है. नर काले हिरण का रंग गहरा भूरा से काला और सींग सर्पिलाकार होते हैं, जबकि मादा हल्के भूरे रंग की होती है.
भविष्य की राह और राष्ट्रीय संदेश
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का मानना है कि ‘मन की बात’ ने छत्तीसगढ़ के नवाचारों को वैश्विक मंच प्रदान किया है. राज्य सरकार पर्यावरण संवर्धन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को जोड़कर एक सुरक्षित भविष्य का निर्माण कर रही है. आज बारनवापारा की खुली वादियों में कुलाचें भरते काले हिरण छत्तीसगढ़ के गौरव का जीवंत साक्ष्य हैं.


