सीजी भास्कर 23 मार्च Bastar Literacy Mission 2026 : Bastar में एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने शिक्षा की ताकत को फिर से साबित कर दिया। ‘उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम’ के तहत आयोजित महापरीक्षा में हजारों लोगों ने हिस्सा लेकर यह दिखा दिया कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती।
25 हजार से ज्यादा परीक्षार्थी, 800 से अधिक केंद्र
इस महापरीक्षा में 25 हजार 706 परीक्षार्थियों ने भाग लिया, जिसके लिए जिलेभर में 812 परीक्षा केंद्र बनाए गए। यह सिर्फ एक परीक्षा नहीं थी, बल्कि उन लोगों के लिए एक नया मौका था, जो कभी किसी वजह से पढ़ाई बीच में छोड़ चुके थे।
Akash Chhikara बोले—‘साक्षरता से बढ़ेगा आत्मविश्वास’
बस्तर कलेक्टर आकाश छिकारा के अनुसार, यह अभियान केवल पढ़ना-लिखना सिखाने तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य लोगों में आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता को बढ़ाना भी है, ताकि वे अपने जीवन में आगे बढ़ सकें।
जेल से लेकर समाज की मुख्यधारा तक दिखा उत्साह
इस परीक्षा की सबसे खास बात रही, इसमें समाज के हर वर्ग की भागीदारी। Jagdalpur Central Jail में बंद 94 पुरुष और 47 महिला बंदियों ने भी परीक्षा दी, वहीं 28 आत्मसमर्पित माओवादी भी इसमें शामिल हुए। यह संकेत है कि शिक्षा अब हर वर्ग तक पहुंच रही है।
साक्षरता दर में सुधार, बदलती तस्वीर
अगर आंकड़ों की बात करें, तो 2011 की जनगणना के अनुसार बस्तर की साक्षरता दर करीब 57 प्रतिशत थी। लेकिन लगातार प्रयासों और जागरूकता अभियानों के चलते इसमें सुधार देखने को मिल रहा है।
बदलते बस्तर की नई पहचान—किताब और कलम
आज बस्तर की पहचान धीरे-धीरे बदल रही है। जहां कभी चुनौतियां हावी थीं, वहीं अब शिक्षा एक नई दिशा दिखा रही है। यहां के लोग अब अपने भविष्य को खुद लिखने के लिए तैयार हैं।
सिर्फ परीक्षा नहीं, एक नई सोच की शुरुआत
यह महापरीक्षा सिर्फ एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक नई सोच की शुरुआत है—जहां शिक्षा को अधिकार के साथ-साथ आत्मनिर्भरता का सबसे मजबूत माध्यम माना जा रहा है। बस्तर से उठी यह लहर साफ बताती है कि बदलाव संभव है, बस पहल की जरूरत होती है।


