सीजी भास्कर, 05 मई : पश्चिम बंगाल (Bengal Election Results 2026) की राजनीति में आए सुनामी जैसे बदलाव के बाद अब नई सरकार के गठन की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। दो-तिहाई से अधिक बहुमत के साथ इतिहास रचने वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) 10 मई से पहले राज्य की कमान संभालने जा रही है। बंगाल के इस चुनावी नतीजे ने न केवल ममता बनर्जी के किले को ध्वस्त कर दिया है, बल्कि भाजपा को 206 सीटों के साथ प्रचंड सत्ता सौंपी है। अब सबकी नजरें दिल्ली में होने वाली उस हाई-प्रोफाइल बैठक पर टिकी हैं, जहां मंत्रिमंडल और मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम मुहर लगेगी।
रवींद्रनाथ टैगोर जयंती पर होगा शक्ति प्रदर्शन
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य ने साफ कर दिया है कि नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह 9 मई को आयोजित किया जाएगा। इस तारीख का चुनाव बेहद सोच-समझकर किया गया है, क्योंकि इस दिन गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती है। बंगाल के चुनावी नतीजे (Bengal Election Results 2026) के बाद यह दिन भाजपा के लिए एक बड़े सांस्कृतिक और राजनीतिक संदेश का जरिया बनेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस तारीख को लेकर संकेत दे दिए हैं। शपथ ग्रहण समारोह को भव्य बनाने के लिए कोलकाता के ऐतिहासिक मैदानों में तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।
अमित शाह के साथ दिल्ली में रणनीतिक मंथन
सरकार के स्वरूप और मंत्रिमंडल की रूपरेखा तैयार करने के लिए शुभेंदु अधिकारी, सामिक भट्टाचार्य और सुनील बंसल सहित कई दिग्गज नेता दिल्ली पहुंच रहे हैं। गृह मंत्री अमित शाह और नितिन नवीन के साथ होने वाली इस बैठक में बंगाल के भविष्य की राजनीतिक रणनीति पर चर्चा होगी। इस बंगाल के चुनावी नतीजे (Bengal Election Results 2026) के बाद यह तय माना जा रहा है कि मंत्रिमंडल में क्षेत्रीय समीकरणों और अनुभवी चेहरों को विशेष जगह मिलेगी। बैठक आज देर रात या कल होने की संभावना है, जिसमें नई सरकार के एजेंडे पर भी बात होगी।
80 सीटों पर सिमटी टीएमसी
200 से अधिक सीटें जीतकर भाजपा ने बंगाल में टीएमसी के 13 साल पुराने राज का अंत कर दिया है। ममता बनर्जी की पार्टी महज 80 सीटों पर सिमट गई है और खुद ममता बनर्जी भवानीपुर से अपनी सीट नहीं बचा सकीं। हार से बौखलाई टीएमसी प्रमुख ने सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग और करीब 100 सीटों पर मतगणना में धांधली का गंभीर आरोप लगाया है। हालांकि, जनता के जनादेश ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बंगाल अब बदलाव की राह पर चल पड़ा है और भाजपा की यह जीत भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक बड़े अध्याय के रूप में दर्ज हो गई है।


