सीजी भास्कर, 17 दिसंबर। छत्तीसगढ़ विधानसभा सत्र के चौथे दिन पंडरिया विधायक भावना बोहरा ने सदन में सक्रिय और मुखर भूमिका निभाते (Bhavna Bohra Vidhan Sabha) हुए न केवल प्रदेश से जुड़े जमीनी मुद्दों को उठाया, बल्कि राष्ट्रीय गीत वन्दे मातरम् पर आयोजित विशेष चर्चा में भी अपने विचार स्पष्ट रूप से रखे। उनकी बातों में सांस्कृतिक चेतना, प्रशासनिक जवाबदेही और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े सवाल एक साथ दिखाई दिए।
विशेष चर्चा के दौरान भावना बोहरा ने कहा कि 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा ने वन्दे मातरम् को राष्ट्रीय गीत का दर्जा दिया था और इसे राष्ट्रगान के समान सम्मान देने की बात कही थी। उन्होंने कहा कि जब संविधान निर्माताओं को इस गीत से कोई आपत्ति नहीं थी, तो आज इस पर चर्चा से परहेज क्यों किया जा रहा है।
वर्ष 2025 में वन्दे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर संसद में हुई ऐतिहासिक बहस का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह गीत स्वतंत्रता आंदोलन की आत्मा है और इसमें उन बलिदानों की भावना समाहित है, जिन्होंने देश को आज़ादी दिलाई।
भावना बोहरा ने सदन में सवाल उठाया कि क्या इतिहास को याद करना राजनीति है, या अपनी सांस्कृतिक जड़ों पर गर्व करना कोई अपराध है। उन्होंने कहा कि अतीत की गलतियों को स्वीकार करना कमजोरी नहीं, बल्कि परिपक्वता का संकेत है और आज का भारत अपने सांस्कृतिक गौरव को आत्मविश्वास के साथ स्वीकार कर रहा है।
ईओडब्ल्यू-एसीबी मामलों में कार्रवाई पर मांगा जवाब
विधायक भावना बोहरा ने पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग से जुड़े भ्रष्टाचार के मामलों को लेकर भी सरकार से जवाब तलब किया। उन्होंने पूछा कि वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 में ईओडब्ल्यू/एसीबी द्वारा दर्ज अपराधों में कितने अधिकारियों के खिलाफ पूर्वानुमोदन के लिए पत्र भेजे गए और उन पर क्या कार्रवाई हुई।
लिखित उत्तर में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने बताया कि इस अवधि में कुल पांच अधिकारियों के संबंध में पत्र प्राप्त (Bhavna Bohra Vidhan Sabha) हुए हैं। इनमें से तीन प्रकरण आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग को स्थानांतरित किए गए हैं, जबकि दो मामलों में प्रतिवेदन प्राप्त करने की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईओडब्ल्यू/एसीबी प्रकरणों में विवेचना हेतु अब तक पूर्वानुमोदन पर अभिमत नहीं दिया गया है।
अतिरिक्त प्रभार और नियमों पर सवाल
भावना बोहरा ने पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों के अन्य विभागों में अतिरिक्त प्रभार को लेकर भी प्रश्न किया। सरकार ने बताया कि वर्तमान में छह अधिकारी अतिरिक्त प्रभार पर कार्यरत हैं, जिनमें से पांच मामलों में जिला कलेक्टर या जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा प्रभार सौंपा गया है। इन पांच मामलों में भारसाधक मंत्री की स्वीकृति नहीं ली गई है, जबकि एक मामले में अनुमोदन प्राप्त है।
पुस्तक वितरण और शिक्षक भर्ती पर सरकार का पक्ष
शासकीय विद्यालयों में पुस्तक वितरण को लेकर उठाए गए प्रश्न पर स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने कहा कि पिछले शैक्षणिक सत्र में विद्यार्थियों की मांग के अनुरूप समय पर पुस्तकों का वितरण किया गया। उन्होंने बताया कि प्रदेशभर में लगभग 2.91 करोड़ पुस्तकों का वितरण किया गया है और प्रत्येक पुस्तक को यूनिक नंबर के माध्यम से ट्रैक किया गया है।
वहीं शिक्षक भर्ती और मध्याह्न भोजन योजना पर भावना बोहरा के सवालों के जवाब में मंत्री ने बताया कि बलरामपुर सहित अन्य क्षेत्रों में बच्चों के बीमार होने की घटनाओं की जांच कराई गई है और दोषी (Bhavna Bohra Vidhan Sabha) पाए गए संबंधित स्वयं सहायता समूह या एनजीओ के अनुबंध रद्द कर दिए गए हैं। सरकार ने यह भी स्वीकार किया कि बस्तर और सरगुजा संभाग में अभी भी 19 विद्यालय शिक्षक विहीन हैं और 1178 विद्यालयों में केवल एक ही शिक्षक कार्यरत है।
भावना बोहरा की इस सक्रिय भागीदारी ने यह स्पष्ट किया कि वे सदन में केवल मुद्दे उठाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि संस्कृति, शिक्षा और प्रशासनिक पारदर्शिता से जुड़े प्रश्नों को एक व्यापक दृष्टिकोण के साथ सामने रख रही हैं। उनकी भूमिका ने विधानसभा की कार्यवाही को न केवल गंभीर बनाया, बल्कि जनहित से जुड़े सवालों को केंद्र में ला दिया।



