सीजी भास्कर 11 फ़रवरी। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल ने राष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचाने वाला बयान (Bhupesh Baghel Claim) दिया है। देश के जाने-माने अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल के पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान भूपेश बघेल ने दावा किया कि उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की ओर से दिल्ली बुलाकर भाजपा में शामिल होने के लिए इशारों-इशारों में दबाव बनाया गया।
भूपेश बघेल के मुताबिक, जब भी वे दिल्ली जाकर इन नेताओं से मुलाकात कर लौटते थे और किसी तरह का राजनीतिक कमिटमेंट नहीं करते थे, तो कुछ ही दिनों बाद उनके परिजनों और करीबी लोगों के यहां केंद्रीय एजेंसियों के छापे पड़ने लगते थे। उनके इस दावे के बाद छत्तीसगढ़ की राजनीति में नई सरगर्मी देखी जा रही है।
“मदद का ऑफर मिला, लेकिन शर्तें समझ में बाद में आईं”
पॉडकास्ट में भूपेश बघेल ने बताया कि शुरुआत में जब उन्हें दिल्ली बुलाया गया, तो उन्होंने इसे एक शिष्टाचार भेंट (Bhupesh Baghel Claim) माना। मुलाकातों के दौरान सामान्य बातचीत के साथ-साथ उनके और उनके करीबियों के खिलाफ चल रहे मामलों का जिक्र किया जाता था और “मदद” का आश्वासन भी दिया जाता था। उन्होंने कहा कि पहले तो उन्हें समझ नहीं आया कि कांग्रेस के मुख्यमंत्री रहते हुए उन्हें इस तरह की मदद का ऑफर क्यों दिया जा रहा है, लेकिन समय के साथ तस्वीर साफ होती चली गई।
“इशारा साफ था – बीजेपी ज्वाइन कीजिए”
भूपेश बघेल का दावा है कि बातचीत के दौरान उन्हें स्पष्ट संकेत दिए जाते थे कि यदि वे भाजपा में शामिल हो जाएं, तो उनके खिलाफ चल रहे मामलों में राहत मिल सकती है। उन्होंने कहा, “मेरा स्टैंड शुरू से साफ था। मैंने कहा कि मैं विपक्ष में हूं और विपक्ष का काम सरकार की आलोचना करना है। मैं वही करता रहूंगा। इसके बावजूद मुझसे पूछा जाता था कि कौन से अधिकारी भरोसेमंद हैं और किस तरह से मदद की जा सकती है।”
दिल्ली से लौटते ही पड़ते थे छापे?
पूर्व मुख्यमंत्री के अनुसार, जब-जब वे इन मुलाकातों के बाद बिना किसी सहमति के लौटते थे, तब कुछ ही समय में उनके या उनके करीबी लोगों के ठिकानों पर केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई शुरू (Bhupesh Baghel Claim) हो जाती थी। उन्होंने यह भी बताया कि एक बार उन्होंने इस बारे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बात की थी। बातचीत में उन्होंने कहा कि मदद के वादे के बावजूद उनके यहां छापे पड़े हैं, जिस पर अधिकारियों से बात करने का आश्वासन दिया गया।
राजनीति में बढ़ी हलचल
भूपेश बघेल का कहना है कि बाद में उन्हें यह पूरी तरह समझ आ गया कि भाजपा में शामिल होने का कमिटमेंट न देने की वजह से ही दबाव बनाने की रणनीति अपनाई जा रही थी। उनके इस बयान के बाद प्रदेश और राष्ट्रीय राजनीति में चर्चाएं तेज हो गई हैं। कांग्रेस इसे राजनीतिक दबाव की मिसाल बता रही है, वहीं भाजपा की ओर से इन आरोपों पर प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।




