Bhupesh Baghel Dhirendra Shastri : छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री को लेकर तीखे तेवर दिखाए हैं। सोशल मीडिया पर लगातार दो पोस्ट के ज़रिए उन्होंने शास्त्रार्थ की चुनौती दी और आस्था के नाम पर दावे करने वालों पर सवाल उठाए। बघेल ने कहा कि प्रदेश के मठ-मंदिरों में बैठे विद्वान साधु-संतों के साथ शास्त्रार्थ करके दिखाया जाए, तभी कथनों की कसौटी तय होगी।
‘सनातन सिखाने का ठेका किसे?’
दूसरे पोस्ट में भूपेश बघेल ने व्यक्तिगत अनुभव का हवाला देते हुए कहा कि वे वर्षों से हनुमान चालीसा और बजरंग बाण का पाठ करते आ रहे हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि सनातन धर्म की व्याख्या किसी एक व्यक्ति के दावों से तय नहीं होती। बघेल के अनुसार, आस्था का प्रदर्शन शोर से नहीं, आचरण से होता है।
सरकारी विमान पर उठे सवाल
मामले ने सियासी रंग तब लिया, जब कांग्रेस ने राज्य सरकार पर संसाधनों के दुरुपयोग का आरोप लगाया। पार्टी के संचार विभाग की ओर से सवाल किया गया कि कथावाचक को लाने के लिए सरकारी विमान की व्यवस्था किस अधिकार के तहत की गई। क्या यह निर्णय सार्वजनिक हित के मानकों पर खरा उतरता है—यह सवाल खुलकर रखा गया।
मान्यता और भूमिका पर बहस
कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि कथावाचन और धर्माचार्य की भूमिका अलग-अलग हैं। उनके मुताबिक, किसी भी धार्मिक दावे की वैधता शास्त्रीय अध्ययन, परंपरा और संवाद से तय होती है, न कि मंचीय प्रस्तुतियों से। पार्टी ने आरोप लगाया कि ऐसे दावे सामाजिक सौहार्द को प्रभावित कर सकते हैं।
राजनीति, आस्था और संस्कृति की टकराहट
इस बयानबाज़ी के बाद प्रदेश की राजनीति में धर्म, आस्था और सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल को लेकर बहस तेज़ हो गई है। एक ओर आस्था की स्वतंत्रता की बात है, तो दूसरी ओर सार्वजनिक जवाबदेही और संवैधानिक मर्यादाओं पर ज़ोर—दोनों ध्रुव आमने-सामने दिख रहे हैं।


