सीजी भास्कर, 09 मई : बिलासपुर में एक मां की दर्दभरी लड़ाई अब अदालत तक पहुंच (Bilaspur High Court) चुकी है। बेटे की पानी में डूबने से मौत के बाद परिवार पूरी तरह टूट गया, लेकिन समय गुजरने के बावजूद आर्थिक सहायता नहीं मिलने से नाराजगी भी बढ़ती गई। आसपास के लोगों के बीच यह मामला चर्चा का विषय बना रहा कि आखिर हादसे के इतने महीनों बाद भी पीड़ित परिवार को राहत क्यों नहीं मिली।
परिजन लगातार दफ्तरों के चक्कर लगाते रहे, लेकिन राहत राशि को लेकर कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई। थक हारकर मां ने आखिरकार न्याय की उम्मीद में उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। अब अदालत के हस्तक्षेप के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।
डूबने से गई थी युवक की जान : Bilaspur High Court
दीपूपारा निवासी प्रभा तिर्की ने अदालत में दायर याचिका में बताया कि उनके बेटे की पानी में डूबने से मौत हो गई थी। हादसे के बाद उन्होंने राजस्व पुस्तक परिपत्र के तहत आर्थिक सहायता के लिए आवेदन लगाया था।
उन्होंने अपने आवेदन के साथ पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मृत्यु प्रमाण पत्र भी जमा किया था। बताया गया कि 28 अक्टूबर 2025 को तहसीलदार कार्यालय में पूरा दस्तावेज प्रस्तुत करने के बाद भी प्रकरण में कोई आगे की कार्रवाई नहीं हुई।
शासन ने आवेदन का रिकॉर्ड होने से किया इंकार
सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से अदालत में कहा गया कि संबंधित कार्यालय में ऐसा कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि मुआवजे के लिए आवेदन दिया गया था। सरकार की तरफ से यह भी कहा गया कि यदि याचिकाकर्ता दोबारा आवेदन प्रस्तुत (Bilaspur High Court) करती हैं तो सक्षम अधिकारी नियमानुसार उस पर कार्रवाई करेंगे।
अदालत ने राहत राशि को लेकर दिए निर्देश
मामले की सुनवाई जस्टिस एके प्रसाद की एकल पीठ में हुई। अदालत ने कहा कि डूबने से मौत होने की स्थिति में राजस्व पुस्तक परिपत्र के तहत सहायता राशि देने का प्रावधान मौजूद है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के 15 दिनों के भीतर नया आवेदन संबंधित अधिकारी के पास जमा करने को कहा है।
45 दिन के भीतर लेना होगा फैसला
उच्च न्यायालय ने राज्य शासन को निर्देश (Bilaspur High Court) दिया है कि आवेदन प्राप्त होने के बाद 45 दिनों के भीतर नियमानुसार फैसला लिया जाए। अदालत के इस आदेश के बाद अब पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।


