सीजी भास्कर, 03 जुलाई। कई शहरों में ई रिक्शा चालकों के बीच इन दिनों एक ही सवाल सबसे ज्यादा सुनाई (BMS Security) दे रहा है कि आखिर चलते वाहन अचानक कैसे बंद हो जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो ने यात्रियों और ड्राइवरों दोनों की चिंता बढ़ा दी है। मामले ने तब और गंभीर रूप ले लिया जब जांच में मोबाइल के जरिए ई रिक्शा को नियंत्रित किए जाने की बात सामने आई।
घटनाओं के बाद पुलिस और साइबर जांच एजेंसियां भी सक्रिय हो गई हैं। शुरुआती पड़ताल में पता चला कि कुछ लोग तकनीकी कमजोरी का फायदा उठाकर ई रिक्शा की बैटरी प्रणाली से छेड़छाड़ कर रहे थे। इसके बाद सुरक्षा व्यवस्था और बैटरी प्रबंधन प्रणाली को लेकर नए सवाल उठने लगे हैं।
मोबाइल ऐप के जरिए रुक रहे थे ई रिक्शा BMS Security
हाल के दिनों में कई जगहों से शिकायतें मिलीं कि चलते हुए ई रिक्शा अचानक बंद हो रहे हैं। जांच के दौरान एक संदिग्ध युवक को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में सामने आया कि मोबाइल ऐप की मदद से बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम की पावर सप्लाई को प्रभावित किया जा रहा था। इससे ई रिक्शा अचानक रुक जाता था, जो यात्रियों के लिए हादसे की वजह बन सकता है।
बताया गया है कि कुछ लोगों ने इस तकनीकी कमी का फायदा उठाकर ड्राइवरों से सर्विस के नाम पर अवैध वसूली करने की भी कोशिश की। कई चालकों को यह तक पता नहीं था कि उनकी बैटरी प्रणाली इस तरह एक्सेस की जा सकती है।
बैटरी प्रबंधन प्रणाली में कहां है कमजोरी
ई रिक्शा में इस्तेमाल होने वाले बैटरी प्रबंधन सिस्टम के साथ एक मोबाइल ऐप काम करता है, जिसे बैटरी की निगरानी और नियंत्रण के लिए बनाया गया है। जानकारी के अनुसार कुछ बैटरियों में उपयोग होने वाले सिस्टम में मजबूत पासवर्ड सुरक्षा नहीं होने के कारण ब्लूटूथ की सीमा में मौजूद कोई भी व्यक्ति उससे जुड़ने की कोशिश कर सकता है।
यदि कनेक्शन बन जाता है तो बैटरी की स्थिति देखना, कुछ सेटिंग बदलना या पावर सप्लाई से छेड़छाड़ करना (BMS Security) संभव हो सकता है। इसी तकनीकी कमी का फायदा उठाकर शरारती तत्व परेशानी खड़ी कर रहे थे।
बैटरी प्रबंधन प्रणाली कैसे करती है काम
बैटरी प्रबंधन प्रणाली लिथियम बैटरी का नियंत्रण केंद्र मानी जाती है। यह लगातार बैटरी का वोल्टेज, तापमान, करंट, चार्जिंग की स्थिति और अन्य जरूरी जानकारियों पर नजर रखती है।
इसमें ब्लूटूथ लो एनर्जी मॉड्यूल लगा होता है, जिससे मोबाइल ऐप के जरिए बैटरी की क्षमता, चार्जिंग चक्र और अन्य तकनीकी जानकारी देखी जा सकती है। इसके लिए मोबाइल का ब्लूटूथ बैटरी की सीमा के भीतर होना जरूरी होता है।
सुरक्षा बढ़ाने का सबसे आसान तरीका
विशेषज्ञों का कहना है कि बैटरी प्रबंधन प्रणाली को यूजरनेम और पासवर्ड के जरिए सुरक्षित किया जा सकता है। यदि उपलब्ध हो तो मजबूत पासवर्ड और दो स्तर की पहचान प्रक्रिया का इस्तेमाल करना चाहिए, ताकि कोई अनधिकृत व्यक्ति सिस्टम तक न पहुंच सके।
इसके साथ ही ई रिक्शा खरीदते समय डीलरों को चालकों को पूरी जानकारी देनी चाहिए कि बैटरी प्रणाली को कैसे सुरक्षित रखना है। प्रशिक्षण और जागरूकता बढ़ने से ऐसी घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।
क्या सोलर ग्रिड भी हो सकते हैं प्रभावित
विशेषज्ञ मानते हैं कि बैटरी प्रबंधन प्रणाली केवल ई रिक्शा तक सीमित (BMS Security) नहीं है। इसी तरह की तकनीक ऊर्जा भंडारण प्रणालियों और कुछ सोलर बैटरी सिस्टम में भी इस्तेमाल होती है। हालांकि बड़े सोलर ग्रिड आम तौर पर अतिरिक्त साइबर सुरक्षा और अलग नियंत्रण प्रणालियों के साथ काम करते हैं, इसलिए उन पर इस तरह का असर सीधे तौर पर नहीं माना जा सकता।
फिर भी जहां साधारण ब्लूटूथ आधारित बैटरी प्रबंधन प्रणाली बिना पर्याप्त सुरक्षा के उपयोग की जा रही है, वहां मजबूत साइबर सुरक्षा उपाय अपनाना जरूरी माना जा रहा है।



