सीजी भास्कर, 03 जुलाई : राजधानी रायपुर के नकटी गांव (Nakti Village Demolition Case) में अतिक्रमण हटाने के नाम पर की गई बर्बरतापूर्ण कार्रवाई ने छत्तीसगढ़ के सियासी पारे को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। भारी बारिश के इस मौसम में बिना किसी ठोस वैकल्पिक व्यवस्था के 85 से अधिक गरीब परिवारों के मकानों को मलबे में तब्दील किए जाने के विरोध में प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस ने साय सरकार के खिलाफ आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया है। इस अमानवीय कृत्य से भड़की प्रदेश कांग्रेस अब पूरे छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का पुतला दहन कर एक उग्र और व्यापक प्रदेशव्यापी आंदोलन छेड़ने जा रही है।
कड़कड़ाती बरसात में आशियाने उजाड़ना अमानवीय
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने सरकार की इस दमनकारी नीति पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि भाजपा सरकार पूरी तरह से संवेदनहीन हो चुकी है। जब पूरा प्रदेश भारी वर्षाकाल के दौर से गुजर रहा है, ऐसे समय में अचानक बुलडोजर चलाकर दर्जनों परिवारों की छत छीन लेना पूरी तरह से अमानवीय और क्रूर कृत्य है। इस कार्रवाई ने सिर्फ लोगों के सिर से साया ही नहीं छीना, बल्कि प्रभावित परिवारों के सामने इस भीषण बरसात में रहने, खाने और आजीविका का एक गंभीर संकट लाकर खड़ा कर दिया है।
बिना पुनर्वास कोई कार्रवाई बर्दाश्त नहीं
दीपक बैज ने दोटूक शब्दों में कहा कि कांग्रेस इस गंभीर मुद्दे पर चुप नहीं बैठेगी और पीड़ित ग्रामवासियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आखिरी सांस तक संघर्ष करेगी। सरकार केवल गरीबों के आशियाने उजाड़ने में व्यस्त है, जबकि प्रभावित परिवारों के समुचित पुनर्वास या उनके रहने की कोई वैकल्पिक व्यवस्था करने की विभाग ने जहमत तक नहीं उठाई। इस अमानवीयता के खिलाफ कांग्रेस पार्टी इस पूरे मामले को सड़क पर उग्र प्रदर्शन से लेकर विधानसभा के मानसून सत्र में सदन के भीतर तक पुरजोर तरीके से उठाएगी और सरकार को बेनकाब करेगी।
ब्लॉक से लेकर जिला मुख्यालयों तक मचेगा हाहाकार
इस मुद्दे पर कांग्रेस के विधायकों ने भी एकजुट होकर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को एक बेहद सख्त शिकायती पत्र भेजा है। पत्र में गरीबों के घर तोड़ने की इस एकतरफा प्रशासनिक कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जताते हुए मांग की गई है कि जब तक सभी प्रभावितों के लिए रहने का पुख्ता इंतजाम नहीं हो जाता, तब तक ऐसी कोई भी कार्रवाई तुरंत रोकी जाए। प्रदेश कांग्रेस ने अपने सभी जिला और ब्लॉक पदाधिकारियों को मुस्तैद रहने और बड़े आंदोलन की तैयारी करने के निर्देश जारी कर दिए हैं। जिला मुख्यालयों में होने वाले इन उग्र प्रदर्शनों के जरिए सरकार पर चौतरफा दबाव बनाया जाएगा ताकि जब तक नकटी के पीड़ितों को उनका हक और न्याय नहीं मिल जाता, तब तक साय सरकार चैन की सांस न ले सके।



