Border Smuggling Network : भारत–नेपाल सीमा के किनारे बसे कई इलाकों में बीते वर्षों से चल रहा एक विशाल तस्करी नेटवर्क अब फिर सुर्खियों में है। अनुमान है कि सुपारी, नकली सुपारी, हवाला रकम और रोजमर्रा के सामानों की तस्करी मिलाकर इस अवैध कारोबार का सालाना आकार करीब 30 हजार करोड़ रुपये तक पहुँच चुका है। स्थानीय सूत्र बताते हैं कि यह नेटवर्क न सिर्फ बेहद संगठित है, बल्कि कई जगह प्रशासनिक ढील और अनदेखी के कारण और मजबूत हुआ है।
सामान का पूरा ‘रूट मैप’ तैयार
तस्करी में शामिल लोग बताते हैं कि भारत से नेपाल जिस माल की सबसे ज्यादा आवाजाही होती है, उसमें सुपारी, भूनी सुपारी, बड़ी–छोटी इलायची और अन्य कच्चा माल प्रमुख हैं। यह सामान सीमा से लगे रक्सौल, बिटछया, सीतामढ़ी, जयनगर, सुपौल, पूर्वी और पश्चिमी चंपारण होते हुए पहले पटना पहुँचता है। इसके बाद या तो रेलवे की चुनिंदा बोगियों का उपयोग किया जाता है या ट्रांसपोर्ट कंपनियों के जरिए माल सीधे नई दिल्ली, कानपुर, रायपुर और बड़े शहरों तक भेज दिया जाता है।
हवाला सिस्टम से भुगतान, उल्टा कमीशन भी
माल की तस्करी जितनी बड़ी है, उसका हवाला सिस्टम उतना ही जटिल। भुगतान पूरी तरह हवाला चैनल से किया जाता है। भारत से नेपाल पैसा भेजने पर कुछ गिरोह 2 प्रतिशत तक ‘उल्टा कमीशन’ देते हैं, यानी भुगतान करने वाला ही कमाई कर लेता है। बड़े हवाला कारोबारी इस काले धन को मनी लॉन्ड्रिंग की परतों से गुज़ारकर (Money Laundering) आगे सफेद कर देते हैं।
सस्ता दाम और मुद्रा विनिमय दर से भारी मुनाफा
नेपाल में कई उत्पाद भारत की तुलना में कम कीमत पर मिलते हैं। साथ ही मुद्रा विनिमय दर का लाभ उठाकर तस्कर एक माल पर कई गुना तक मुनाफा कमा लेते हैं। यही वजह है कि नकली सुपारी, गुटखा, किराना से लेकर एफएमसीजी प्रोडक्ट्स तक इस रास्ते से भेजे जाते हैं। कई बार पकड़ में आया सामान दिखाता है कि एक ही शिपमेंट में दर्जनों तरह का माल मिला होता है।
विशेष ट्रेन बोगियां और ट्रांसपोर्ट की मदद से चलता नेटवर्क
जांच में सामने आया है कि कुछ चुनिंदा ट्रेन बोगियों का लगातार इस्तेमाल हो रहा है। इन्हीं रूट्स पर कार्यरत कुछ ट्रांसपोर्ट कंपनियाँ तस्करों की पसंदीदा बन चुकी हैं। लॉजिस्टिक चेन इतनी परतदार है कि एक ही ट्रक का सीधा किसी तस्कर से कनेक्शन साबित करना लगभग असंभव हो जाता है।
आर्थिक सुरक्षा को गंभीर खतरा
यह पूरा अवैध व्यापार भारत की आर्थिक सुरक्षा, राजस्व और घरेलू बाजारों पर सीधा असर डाल रहा है। कई स्तरों पर मिलीभगत, देर से कार्रवाई और सीमावर्ती इलाकों में निगरानी की कमी के कारण यह नेटवर्क वर्षों से सक्रिय है और अब संगठित अपराध की शक्ल ले चुका है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक सीमा ट्रेड की सख्त मॉनिटरिंग और हवाला चैनलों पर कठोर निगरानी नहीं बढ़ाई जाती, तब तक इस काले कारोबार पर निर्णायक रोक लगाना मुश्किल ही रहेगा।




