सीजी भास्कर, 08 अप्रैल | सनातन धर्म और बौद्ध धर्म में वैशाख मास की पूर्णिमा का अत्यधिक महत्व (Budh Purnima 2026) है। इसी पावन तिथि को भगवान गौतम बुद्ध का जन्मोत्सव मनाया जाता है, जिसे ‘बुद्ध पूर्णिमा’ या ‘वैसाक’ के नाम से भी जाना जाता है। इस वर्ष बुद्ध पूर्णिमा की तारीख को लेकर लोगों के मन में संशय है कि यह 30 अप्रैल को मनाई जाएगी या 1 मई को। धार्मिक पंचांग और तिथियों की गणना के अनुसार, इस साल बुद्ध पूर्णिमा का उत्सव 1 मई 2026 को मनाया जाएगा। यह दिन न केवल भगवान बुद्ध के जन्म का प्रतीक है, बल्कि उन्हें ज्ञान (बोध) की प्राप्ति भी इसी दिन हुई थी।
पूर्णिमा तिथि और मुहूर्त का समय (Budh Purnima 2026)
ज्योतिष गणना के अनुसार, वैशाख पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 30 अप्रैल 2026 की रात 09:12 बजे से हो जाएगी। चूंकि हिंदू धर्म में उदय तिथि का विशेष महत्व होता है, इसलिए पूर्णिमा का व्रत और उत्सव 1 मई को मनाया जाएगा। इस तिथि का समापन 1 मई 2026 की रात 10:52 बजे होगा। जो लोग इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और दान करना चाहते हैं, उनके लिए 1 मई का दिन ही शास्त्र सम्मत और श्रेष्ठ है।
बुद्ध पूर्णिमा के खास मुहूर्त
1 मई को पूजा-पाठ और शुभ कार्यों के लिए कई विशेष मुहूर्त बन (Budh Purnima 2026) रहे हैं। सुबह ब्रह्म मुहूर्त 04:15 बजे से 04:58 बजे तक रहेगा, जो ध्यान और साधना के लिए सर्वोत्तम है। इसके अलावा अभिजित मुहूर्त दोपहर 11:52 बजे से 12:45 बजे तक रहेगा। वहीं, अमृत काल शाम 06:56 बजे से रात 08:41 बजे तक रहेगा। इन शुभ समयों में की गई पूजा और दान का फल अनंत गुना बढ़ जाता है।
आस्था और परंपराओं का संगम
बुद्ध पूर्णिमा के दिन बौद्ध धर्म के अनुयायी अपने घरों को दीपों और फूलों से सजाते (Budh Purnima 2026) हैं। इस दिन बोधि वृक्ष की पूजा की जाती है और बोधगया में दुनिया भर से श्रद्धालु जुटते हैं। धार्मिक ग्रंथों का पाठ और दान-पुण्य करना इस दिन का मुख्य हिस्सा है। बुद्ध पूर्णिमा केवल भारत में ही नहीं, बल्कि चीन, श्रीलंका, वियतनाम और मलेशिया जैसे कई देशों में बड़े उत्साह के साथ मनाई जाती है। यह पर्व शांति, अहिंसा और करुणा का संदेश देता है, जो भगवान बुद्ध की शिक्षाओं का मूल आधार है।



