सीजी भास्कर, 18 सितंबर। छत्तीसगढ़ में सशस्त्र बल (सीएएफ) के जवानों की तैनाती को लेकर अब बड़ा बदलाव किया गया है। पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अरुण देव गौतम ने आदेश जारी किया है कि जवानों की तैनाती (CAF Deployment Order) अब केवल एडीजी (गुप्तवार्ता) की अनुमति से ही संभव होगी।
डीजीपी का आदेश सभी रेंज के आइजी, एसपी, बटालियन सेनानी और पुलिस ट्रेनिंग स्कूलों तक भेजा गया है। आदेश में कहा गया है कि कई जिलों में सीएएफ जवानों को स्थानीय अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और प्रभावशाली व्यक्तियों की निजी सुरक्षा में अनधिकृत रूप से लगाया जा रहा था। इससे बल की वास्तविक तैनाती (CAF Deployment Order) प्रभावित हो रही थी और नक्सल विरोधी अभियानों के साथ कानून-व्यवस्था बनाए रखने में भी कठिनाई आ रही थी।
जवानों की गलत तैनाती पर लगाम
पुलिस विभाग ने पाया कि कई जिलों में पीएसओ ड्यूटी के नाम पर जवानों की तैनाती (CAF Deployment Order) मनमाने तरीके से की जा रही थी। इन जवानों का इस्तेमाल जनप्रतिनिधियों और प्रभावशाली लोगों की निजी सुरक्षा के लिए किया जा रहा था। डीजीपी ने इसे गंभीर मुद्दा बताते हुए कहा कि सीएएफ जवानों का असली काम नक्सल विरोधी अभियान और राज्य की आंतरिक सुरक्षा है, न कि निजी सेवा देना।
लापरवाही पर सख्त कार्रवाई
डीजीपी अरुण देव गौतम ने स्पष्ट किया है कि जवानों को उनके मूल कर्तव्यों से हटाकर पीएसओ ड्यूटी में लगाना राज्य की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। उन्होंने यह भी कहा कि अब यह सुनिश्चित किया जाएगा कि बिना उच्चस्तरीय अनुमति के किसी भी जवान को ऐसी ड्यूटी पर नहीं लगाया जाए। आदेश में साफ चेतावनी दी गई है कि नियमों की अवहेलना करने वाले अधिकारियों और जिम्मेदार कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
सुरक्षा पर होगा सीधा असर
विशेषज्ञों का मानना है कि सीएएफ जवानों की सही तैनाती (CAF Deployment Order) से न केवल नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि राज्य में कानून-व्यवस्था भी और अधिक सुदृढ़ होगी। इस फैसले के बाद जवानों की क्षमता और संसाधनों का उपयोग प्राथमिक सुरक्षा कार्यों में किया जा सकेगा।






