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Cage Culture : 54 केज से बदली मछुआ समिति की किस्मत, 50 लाख तक पहुंची आय

By Newsdesk Admin
20/08/2026
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एमसीबी, 19 अगस्त : ग्राम शंकरगढ़ का 10.70 हेक्टेयर जलाशय अब ग्रामीणों की आय और रोजगार का बड़ा जरिया बन गया है। ब्लू-लाईन मछुआ सहकारी समिति ने आधुनिक केज कल्चर (Cage Culture) तकनीक अपनाकर मछली उत्पादन को नई ऊंचाई दी है। समिति के 54 केज से सालाना 30 से 40 टन तक मछली उत्पादन हो रहा है और बिक्री से करीब 45 से 50 लाख रुपये तक की आय प्राप्त हो रही है।

Contents
  • पारंपरिक मत्स्य पालन से आधुनिक तकनीक तक
  • 54 केज से 30-40 टन मछली उत्पादन
  • 50 लाख तक पहुंची आय, 8-12 लाख रुपये शुद्ध लाभ
  • 20 से अधिक लोगों को मिला रोजगार
  • तकनीकी प्रशिक्षण से बढ़ा आत्मविश्वास
  • जलाशय बना आत्मनिर्भरता का आधार

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पारंपरिक मत्स्य पालन से आधुनिक तकनीक तक

ब्लू-लाईन मछुआ सहकारी समिति मर्यादित, मनेन्द्रगढ़ का पंजीयन 29 अक्टूबर 2021 को हुआ था। समिति ने शंकरगढ़ स्थित जलाशय को लीज पर लेकर मछली पालन शुरू किया। पारंपरिक तरीके से उत्पादन सीमित रहने के बाद सदस्यों ने जल संसाधन का बेहतर उपयोग करने के लिए आधुनिक तकनीक अपनाने का निर्णय लिया।

इसी के तहत वित्तीय वर्ष 2024-25 में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के सहयोग से जलाशय में 54 केज स्थापित किए गए। इन केजों में मोनोसेकस तिलापिया और पंगाशियस का वैज्ञानिक तरीके से पालन शुरू किया गया। मत्स्य विभाग की तकनीकी मदद से बीज, आहार, स्वास्थ्य और जल गुणवत्ता की नियमित निगरानी की जाने लगी।

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54 केज से 30-40 टन मछली उत्पादन

समिति के 54 केजों में गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज और संतुलित आहार का उपयोग किया जा रहा है। मछलियों की उम्र, आकार और वृद्धि के अनुसार आहार की मात्रा तय की जाती है। इसके साथ ही केजों की नियमित देखभाल, पानी की गुणवत्ता की जांच और मछलियों के स्वास्थ्य की निगरानी की जाती है।

वैज्ञानिक प्रबंधन का परिणाम यह रहा कि समिति को वर्तमान में करीब 30 से 40 टन मछली उत्पादन मिल रहा है। केज कल्चर (Cage Culture) ने सीमित जल क्षेत्र में उत्पादन बढ़ाने का प्रभावी रास्ता तैयार किया है।

50 लाख तक पहुंची आय, 8-12 लाख रुपये शुद्ध लाभ

मछलियों की बिक्री से समिति को करीब 45 से 50 लाख रुपये तक की आय प्राप्त हो रही है। इसमें लगभग 30-35 लाख रुपये चारे, 2-3 लाख रुपये मत्स्य बीज, 4-5 लाख रुपये मजदूरी और 1-2 लाख रुपये दवाइयों व अन्य प्रबंधन कार्यों पर खर्च होते हैं।

इन खर्चों के बाद समिति को करीब 8 से 12 लाख रुपये तक का शुद्ध लाभ मिल रहा है। इस आय का सीधा लाभ समिति के 23 सदस्यों को मिल रहा है। प्रत्येक सदस्य को लगभग 34 हजार से 52 हजार रुपये तक लाभांश प्राप्त हो रहा है।

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20 से अधिक लोगों को मिला रोजगार

मत्स्य पालन की इस गतिविधि से गांव में रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं। केजों की देखभाल, मछलियों को आहार देने, स्वास्थ्य और वृद्धि की निगरानी, मछली निकालने, छंटाई, परिवहन और बाजार तक पहुंचाने जैसे कार्यों में 20 से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिल रहा है।

इस तरह जलाशय से बाजार तक पूरी आर्थिक गतिविधि विकसित हुई है। मछली पालन अब केवल पारंपरिक आजीविका नहीं रहा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने वाली संगठित गतिविधि बन गया है।

तकनीकी प्रशिक्षण से बढ़ा आत्मविश्वास

समिति की सफलता में मत्स्य विभाग का तकनीकी मार्गदर्शन महत्वपूर्ण रहा। केज स्थापना से लेकर मत्स्य बीज संचयन, आहार प्रबंधन, जल गुणवत्ता, मछलियों के स्वास्थ्य और उत्पादन प्रक्रिया तक विभाग की ओर से आवश्यक सहयोग दिया गया।

समिति के सदस्यों ने प्रशिक्षण के जरिए वैज्ञानिक मत्स्य पालन की तकनीक सीखी और उसे अपने दैनिक काम में अपनाया। इससे उत्पादन प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित हुई और मछलियों की वृद्धि के अनुसार बेहतर प्रबंधन संभव हो सका।

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जलाशय बना आत्मनिर्भरता का आधार

ब्लू-लाईन मछुआ सहकारी समिति की सफलता बताती है कि प्राकृतिक संसाधन, आधुनिक तकनीक, सरकारी योजना और सामूहिक प्रयास मिलकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बना सकते हैं। समिति के अध्यक्ष संतोष मांझी और 23 सदस्यों ने जलाशय की क्षमता को पहचानकर उसे आय के स्थायी स्रोत में बदल दिया है।

आज शंकरगढ़ का 10.70 हेक्टेयर जलाशय 54 केजों के जरिए 30-40 टन मछली उत्पादन, 45-50 लाख रुपये तक की आय और 8-12 लाख रुपये तक के शुद्ध लाभ का आधार बन चुका है। समिति अब उत्पादन बढ़ाने और अधिक स्थानीय लोगों को रोजगार से जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

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