सीजी भास्कर, 24 जून। धमतरी जिले में कृषि क्षेत्र को नई दिशा देने वाली एक महत्वाकांक्षी पहल शुरू होने (Carbon Farming) जा रही है। बदलते मौसम, मिट्टी की गुणवत्ता और किसानों की आय से जुड़ी चुनौतियों के बीच अब ऐसा मॉडल तैयार किया जा रहा है, जो खेती को अधिक लाभकारी और पर्यावरण के अनुकूल बनाने का दावा करता है।
जिला प्रशासन और एक विशेषज्ञ संस्था के बीच हुए समझौते के बाद धमतरी को प्रदेश के पहले मॉडल कार्बन कृषि जिले के रूप में विकसित करने की तैयारी शुरू हो गई है। इस योजना से किसानों को भविष्य में अतिरिक्त आय के नए अवसर मिलने की संभावना जताई जा रही है।
छत्तीसगढ़ का पहला मॉडल कार्बन कृषि जिला बनेगा धमतरी Carbon Farming
धमतरी जिले को कार्बन आधारित कृषि मॉडल के रूप में विकसित करने के लिए जिला प्रशासन और प्रिथु संस्था के बीच समझौता ज्ञापन किया गया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना, मिट्टी की गुणवत्ता सुधारना और जलवायु अनुकूल खेती को बढ़ावा देना है।
80 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में होगा काम
परियोजना के पहले चरण में जिले के लगभग 80 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में मृदा कार्बन संवर्धन अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान के तहत खेतों की उत्पादकता बढ़ाने और मिट्टी में जैविक तत्वों को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
धान खेती में अपनाई जाएगी नई तकनीक
करीब 30 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में ऑल्टरनेट वेटिंग एंड ड्राइंग तकनीक के जरिए धान उत्पादन को अधिक वैज्ञानिक बनाया जाएगा। इस पद्धति से सिंचाई के लिए पानी की खपत कम होगी और खेतों की उत्पादकता बनाए रखने में मदद मिलेगी।
तीन साल में होगा 5 करोड़ का निवेश
परियोजना को सफल बनाने के लिए अगले तीन वर्षों में लगभग 5 करोड़ रुपये का निवेश (Carbon Farming) किया जाएगा। इस दौरान किसानों को नई तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी बढ़ाए जाएंगे।
कार्बन क्रेडिट से बढ़ सकती है कमाई
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान कार्बन संवर्धन और जल संरक्षण आधारित खेती अपनाते हैं तो भविष्य में उन्हें कार्बन क्रेडिट का लाभ मिल सकता है। यह व्यवस्था किसानों के लिए आय का एक अतिरिक्त स्रोत बन सकती है।
250 करोड़ तक अतिरिक्त आय का अनुमान
परियोजना से जुड़े आकलनों के अनुसार आने वाले वर्षों में जिले के किसानों को सामूहिक रूप से लगभग 250 करोड़ रुपये तक की अतिरिक्त आय प्राप्त (Carbon Farming) हो सकती है। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ कृषि को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बनाने में मदद मिलेगी।





