सीजी भास्कर, 31 मई : छत्तीसगढ़ के सियासी और सामाजिक गलियारों से इस वक्त की सबसे अनोखी, दिलचस्प और नई राजनीतिक बहस को जन्म देने वाली एक बेहद बड़ी खबर सामने आई है। बेमेतरा विधानसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक (CG Bemetara MLA Marriage) दीपेश साहू ने अपनी शादी को लेकर एक ऐसा अभूतपूर्व फैसला किया है, जिसने सबको चौंका दिया है।
अमूमन आलीशान होटलों और करोड़ों के खर्च वाली वीआईपी शादियों से दूर, बीजेपी विधायक आज सरकारी योजना के तहत होने वाले सामूहिक विवाह समारोह में एक गरीब परिवार की बेटी के साथ सात फेरे लेने जा रहे हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आयोजित ‘मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना’ के तहत बेमेतरा में आयोजित इस बड़े समागम में कुल 21 जोड़ों का निकाह और ब्याह संपन्न होना है, जिसमें एक जोड़ा खुद सत्ताधारी दल के माननीय विधायक का होगा। इस ऐतिहासिक कदम (CG Bemetara MLA Marriage) के सामने आते ही जहां सूबे के मुख्यमंत्री ने इसकी जमकर तारीफ की है, वहीं विपक्षी दल कांग्रेस ने इस पर कड़ा कानूनी और नैतिक सवाल खड़ा कर दिया है।
दरअसल, इस शादी का सस्पेंस और इसकी सबसे बड़ी खूबी इसकी सादगी और ग्रामीण परिवेश है। करीब 10 वर्षों तक सरकारी स्कूल में बच्चों का भविष्य संवारने वाले शिक्षक से अचानक राजनीति के शीर्ष पर पहुंचे विधायक दीपेश साहू की बारात किसी चमचमाती लग्जरी कार से नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की पारंपरिक बैलगाड़ी पर निकलेगी। स्थानीय लोक संस्कृति को सहेजने के इस अनूठे प्रयास के बीच इस वीआईपी सामूहिक मंडप में प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, कई कैबिनेट मंत्री और आला अधिकारियों की मौजूदगी का कड़ा प्रोटोकॉल भी देखने को मिलेगा, जिससे इस साधारण से दिखने वाले आयोजन की भव्यता सातवें आसमान पर पहुंच गई है।
ड्राइवर की एमए पास बेटी से होगा ब्याह
इस विवाह का सबसे मार्मिक और खूबसूरत पहलू दुल्हन तरुणा साहू की पृष्ठभूमि है। दुर्ग जिले की धमधा तहसील के एक छोटे से गांव बिरोदा की रहने वाली तरुणा साहू ने घोर अभावों के बीच एमए (MA) तक की उच्च शिक्षा हासिल की है। उनके पिता देवनारायण साहू पेशे से एक साधारण ड्राइवर हैं और माता मालती साहू गृहिणी हैं, जिनका परिवार वर्तमान में गरीबी रेखा के नीचे (BPL) जीवन यापन करता है। विधायक ने इस विवाह के माध्यम से समाज में एक कड़ा संदेश देने के लिए शासकीय योजना के तहत मिलने वाली पूरी आर्थिक सहायता राशि को खुद न रखकर, क्षेत्र की मेधावी और गरीब छात्राओं की उच्च शिक्षा और कॉलेज की पढ़ाई के खर्च के लिए दान करने का एक बड़ा और आक्रामक फैसला किया है।
लेकिन, इस शादी के पीछे चल रहा असली सस्पेंस और राजनीतिक ढर्रा अब चुनावी रंग ले चुका है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज ने इस पूरे आयोजन पर तीखा और आक्रामक हमला बोलते हुए ‘मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना’ की पात्रता के नियमों पर ही उंगली उठा दी है। दीपक बैज ने पूछा कि क्या लाखों रुपये का वेतन और भत्ता पाने वाले एक सिटिंग विधायक का सरकारी खर्चे और गरीबों के लिए बनी योजना के तहत ब्याह रचाना नियम (CG Bemetara MLA Marriage) के दायरे में आता है? उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की इस जनहितैषी योजना का मकसद केवल जरूरतमंदों की मदद करना है, न कि सत्तापक्ष के नेताओं के लिए पब्लिसिटी स्टंट का जरिया बनना।
लड़की के बीपीएल कार्ड पर तय हुई पात्रता!
कांग्रेस के इन तीखे आरोपों और आक्रामक घेराबंदी का जवाब देने के लिए खुद विधायक दीपेश साहू ने मोर्चा संभाला। उन्होंने पलटवार करते हुए साफ किया कि कांग्रेस को नियम-कायदों का ज्ञान नहीं है, क्योंकि मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना में पात्रता हमेशा कन्या (दुल्हन) के परिवार के आर्थिक स्तर और बीपीएल दर्जे के आधार पर तय की जाती है, न कि दूल्हे की हैसियत पर। चूंकि तरुणा साहू का परिवार पूरी तरह से बीपीएल श्रेणी के कड़े मापदंडों के अंतर्गत आता है, इसलिए उनका यह रजिस्ट्रेशन पूरी तरह से कानूनी और वैध है।
इस पूरे विवाद के बीच मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (Twitter) पर एक बेहद भावुक और आक्रामक पोस्ट लिखकर विधायक दीपेश साहू के इस कदम की सराहना की है। सीएम ने इसे सामाजिक समरसता, दिखावे से दूर सादगी और वीआईपी कल्चर में बड़े बदलाव (CG Bemetara MLA Marriage) का एक जीवंत उदाहरण बताया है। अब छत्तीसगढ़ की राजनीति में सबसे बड़ा सस्पेंस और चुनौती यह है कि क्या इस अनोखी शादी के बाद प्रदेश के अन्य रसूखदार नेता भी इस सादगी के ढर्रे को अपनाएंगे, या फिर यह सियासी रार आने वाले दिनों में और ज्यादा गति (CG Bemetara MLA Marriage) पकड़ेगी? बहरहाल, बेमेतरा का यह सामूहिक विवाह मंडप आज पूरे देश की मीडिया की सुर्खियों में बना हुआ है।




