सीजी भास्कर, 20 नवंबर। राज्य में पहली बार प्ले स्कूलों (CG Play School) के संचालन पर नियंत्रण और मानकीकरण के लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने विस्तृत दिशा-निर्देश (SOP) जारी किए हैं। इसके साथ ही अब तक बिना किसी नियमन के चल रहे प्ले स्कूलों को शिक्षा विभाग के दायरे में ला दिया गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि 3 वर्ष से कम आयु के बच्चों का प्रवेश अब किसी भी प्ले स्कूल में नहीं होगा, जबकि सभी संचालकों को तीन माह के भीतर जिला शिक्षा अधिकारी से रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा।
नई एसओपी (CG Play School) के अनुसार जिन स्कूलों में कक्षा-1 से ऊपर की कक्षाएँ नहीं हैं, वे अपने नाम में अनिवार्य रूप से ‘प्ले स्कूल’ शब्द शामिल करेंगे। अब तक राज्य में प्ले स्कूलों के लिए किसी भी तरह की मान्यता प्रक्रिया लागू नहीं थी, जबकि प्राइमरी से हायर सेकेंडरी स्तर के निजी स्कूलों को शिक्षा विभाग से अनुमति लेनी पड़ती थी। विभाग का कहना है कि यह कदम छोटे बच्चों की सुरक्षा और बेहतर प्री-स्कूलिंग व्यवस्था के लिए जरूरी था।
भवन और सुविधाओं के लिए सख्त मानक
दिशा-निर्देशों के अनुसार प्ले स्कूल के प्रत्येक कमरे का हवादार और सुरक्षित होना आवश्यक है। लड़के और लड़कियों के लिए अलग शौचालय, साफ पीने का पानी, बच्चों के लिए रेस्ट रूम, खेल क्षेत्र, साफ-सफाई की व्यवस्था, साबुन, वाशबेसिन और डस्टबिन उपलब्ध होना चाहिए। परिसर में सीसीटीवी कैमरे, बाउंड्रीवाल तथा अग्निशमन उपकरण अनिवार्य किए गए हैं।
स्कूल का समय प्रतिदिन 3 से 4 घंटे ही रखा जाएगा।
राष्ट्रीय बाल अधिकार आयोग के निर्देश लागू होंगे
प्री-प्राइमरी स्कूलों को राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के सभी दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा। शिक्षा विभाग का कहना है कि यह व्यवस्था बच्चों की सुरक्षा, पोषण और व्यवहारिक सीख को ध्यान में रखकर बनाई गई है।
प्री-प्राइमरी पालक-शिक्षक समिति बनेगी
हर निजी प्री-प्राइमरी स्कूल में पालक-शिक्षक समिति का गठन अनिवार्य किया गया है।
यह समिति स्कूल शुरू होने के एक महीने के भीतर बनेगी।
समिति में 75% पालक और 25% शिक्षक शामिल होंगे।
अध्यक्ष का चयन पालकों में से होगा।
हर तीन माह में बैठक आयोजित की जाएगी।
(CG Play School) नियम क्यों जरूरी थे
छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने कहा कि प्ले स्कूलों के लिए नियम लंबे समय से लंबित थे। उन्होंने कहा कि “दिशा-निर्देश बच्चों और पालकों के हित में हैं। यह पहली सीढ़ी है, जिससे प्री-प्राइमरी शिक्षा को ढांचे में लाया जा सकेगा।”
नई एसओपी लागू होने के बाद राज्य में प्ले स्कूलों की व्यवस्था अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और नियंत्रित होने की उम्मीद है। शिक्षा विभाग का कहना है कि ये दिशा-निर्देश छोटे बच्चों की सुरक्षा और गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।


