सीजी भास्कर, 18 जून : छत्तीसगढ़ को कुपोषण मुक्त (CG Suposhan Vriksha Munga ) और सेहतमंद राज्य बनाने की दिशा में महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण विभाग ने एक बेहद अनूठी और पर्यावरण अनुकूल मुहिम की शुरुआत की है। प्रदेश की महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने राज्य में जनस्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने और कुपोषण की समस्या को जड़ से उखाड़ने के लिए ‘‘सुपोषण वृक्ष-मुनगा’’ अभियान को एक बड़ा जनआंदोलन का स्वरूप देने का आह्वान किया है। उन्होंने इस वर्षा ऋतु (मॉनसून सीजन) के दौरान पूरे प्रदेश में व्यापक स्तर पर सहजन (मुनगा) के पौधे लगाने के लिए सभी जनप्रतिनिधियों, त्रिस्तरीय ग्राम पंचायतों और नगरीय निकायों को विशेष पत्र लिखकर इस महा-अभियान से जुड़ने की भावुक अपील की है।
मैदानी स्तर पर उतरेगा अमला
मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने अपने आधिकारिक पत्र में उल्लेख किया है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के कुशल नेतृत्व में प्रदेश के बच्चों और महिलाओं को सुपोषित बनाने का संकल्प लिया गया है। इसी परिकल्पना को साकार करने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा राज्य के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों, सरकारी परिसरों और सीधे योजना के हितग्राहियों के घरों की बाड़ियों में ‘‘सुपोषण वृक्ष-मुनगा’’ का रोपण किया जाएगा। विभाग का लक्ष्य ‘‘घर-घर मुनगा, हर घर सुपोषण’’ के नारे को छत्तीसगढ़ के अंतिम छोर पर बसे हर गांव और मजरे-टोले तक पहुंचाना है, ताकि कुपोषण के खिलाफ लड़ाई को हर परिवार अपनी व्यक्तिगत जिम्मेदारी समझे।
क्यों मुनगा को कहा जाता है ‘मदर ट्री’? जानें इसके जादुई फायदे
पोषक तत्वों के मामले में मुनगा (सहजन) प्रकृति का एक अद्भुत और अनमोल वरदान है। पोषण की दृष्टि से यह इतना शक्तिशाली और समृद्ध है कि चिकित्सा और वनस्पति विज्ञान में इसे ‘‘मदर ट्री’’ (Mother Tree) के गौरवशाली नाम से भी जाना जाता है। मंत्री राजवाड़े ने पत्र में इसके फायदों को रेखांकित करते हुए बताया कि
पोषक तत्वों का खजाना : मुनगा की पत्तियां, उसकी हरी फलियां, फूल और जड़ें, सभी भाग औषधीय और पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं।
विटामिन्स और मिनरल्स : इसमें शरीर के लिए बेहद जरूरी प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन (लोहा), विटामिन ‘ए’ और विटामिन ‘सी’ प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।
एनीमिया से मुक्ति : मुनगा का नियमित सेवन करने से गर्भवती महिलाओं, किशोरियों और बच्चों में खून की कमी (एनीमिया) जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं की रोकथाम बहुत ही आसानी और प्राकृतिक तरीके से होती है। यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) को भी तेजी से बढ़ाता है।
इन सार्वजनिक और निजी स्थानों पर रोपे जाएंगे पौधे
लक्ष्मी राजवाड़े ने जिला स्तर से लेकर पंचायत स्तर के सभी जनप्रतिनिधियों (सांसद, विधायक, महापौर, सरपंच, पार्षद) से आग्रह किया है कि वे चालू मानसून के मौसम में अपने-अपने क्षेत्रों में जल स्रोतों (तालाबों, कुओं) के आसपास, ग्राम पंचायत भवनों, स्कूलों, सार्वजनिक खेल मैदानों और गरीब परिवारों के घरों के आंगन में मुनगा पौधों का रोपण अनिवार्य रूप से सुनिश्चित कराएं।
उन्होंने साफ तौर पर कहा कि जब तक इस अभियान में आम जनता की सक्रिय भागीदारी (जनसहभागिता) नहीं होगी, तब तक इसके दूरगामी परिणाम नहीं मिलेंगे। यह अभियान न केवल प्रदेश को कुपोषण से मुक्ति दिलाएगा, बल्कि ग्रामीण अंचलों में पारंपरिक और पौष्टिक खान-पान के प्रति एक नई जागरूकता भी पैदा करेगा। उन्होंने सभी प्रदेशवासियों से इस सुपोषण यज्ञ में अपनी आहुति देकर ‘‘सुपोषित छत्तीसगढ़’’ के सपने को सच करने की अपील की है।





