सीजी भास्कर 31 अगस्त।
मुंबई। मराठा आरक्षण को लेकर राज्य की सियासत गर्म है। कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटील बीते शुक्रवार से मुंबई के आजाद मैदान में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं।
इस आंदोलन के बीच महाराष्ट्र की राजनीति में बयानबाज़ी तेज हो गई है।
चंद्रकांत पाटिल का बयान
बीजेपी नेता और कैबिनेट मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि आंदोलन करना सबका अधिकार है, लेकिन आम मुंबईकरों को परेशान करना या उन्हें बंधक बनाना गलत है।
फडणवीस की तुलना शिवाजी महाराज से किए जाने पर उन्होंने कहा –
“मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस छत्रपति शिवाजी महाराज के पदचिन्हों पर चलकर काम कर रहे हैं। लेकिन हमने कभी भी शिवाजी महाराज की सीधी तुलना नहीं की, क्योंकि ऐसा करने से विवाद खड़ा हो सकता है।”
आरक्षण पर क्या कहा?
मराठा आरक्षण को लेकर चंद्रकांत पाटील ने कहा कि बिना वैध प्रमाणपत्र के किसी को भी ओबीसी वर्ग से आरक्षण मिलना संभव नहीं है। अगर दबाव में कोई निर्णय भी ले लिया जाए तो वह अदालत में नहीं टिकेगा।
उन्होंने शरद पवार पर निशाना साधते हुए कहा कि वह चार बार मुख्यमंत्री रहे,
लेकिन तमिलनाडु की तरह आरक्षण का मॉडल क्यों लागू नहीं कर पाए? वहीं, उन्होंने दावा किया कि मराठा समाज सामाजिक रूप से पिछड़ा नहीं है और उनके लिए वास्तविक विकल्प सिर्फ EWS आरक्षण है।
चंद्रकांत पाटिल ने आंदोलन पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह सिर्फ पंचायत चुनावों में राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश है।
संजय राउत का पलटवार
दूसरी ओर उद्धव ठाकरे गुट के नेता संजय राउत ने केंद्र सरकार और गृहमंत्री अमित शाह पर निशाना साधा।
उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के कोने-कोने से मराठा समाज के लोग मुंबई आए हैं और हजारों की संख्या में आंदोलन में शामिल हो रहे हैं।
संजय राउत ने आरोप लगाया कि सरकार मराठा समाज की पीड़ा को नजरअंदाज कर रही है।
उन्होंने कहा कि जरांगे पाटील बारिश और कठिन परिस्थितियों में भूख हड़ताल पर बैठे हैं, जबकि सरकार संवेदनहीन बनी हुई है।