सीजी भास्कर, 21 जनवरी | रायपुर। Chhattisgarh BJP National Leadership : भारतीय जनता पार्टी की शीर्ष संगठनात्मक जिम्मेदारी एक बार फिर ऐसे चेहरे को सौंपी गई है, जिसका छत्तीसगढ़ से सीधा और व्यावहारिक जुड़ाव रहा है। नितिन नबीन का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना केवल पद परिवर्तन नहीं, बल्कि यह उस राजनीतिक दिशा का संकेत है, जिसमें छत्तीसगढ़ की भूमिका अब सिर्फ राज्य तक सीमित नहीं रह गई है।
नड्डा के बाद नबीन, एक स्पष्ट पैटर्न
जेपी नड्डा के बाद नितिन नबीन का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना पार्टी के भीतर एक स्पष्ट पैटर्न को सामने लाता है। छत्तीसगढ़ जैसे संघर्षशील और राजनीतिक रूप से संवेदनशील राज्य में काम कर चुके नेताओं को अब राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारी दी जा रही है। यह प्रयोग पहले भी हुआ, सफल रहा और अब उसी अनुभव को आगे बढ़ाया जा रहा है।
छत्तीसगढ़ से दिल्ली तक पहुंची जमीनी रिपोर्ट
नितिन नबीन ने प्रभारी रहते हुए छत्तीसगढ़ की राजनीति को केवल आंकड़ों में नहीं, बल्कि ज़मीन पर जाकर समझा। आदिवासी अंचलों की अलग प्राथमिकताएं, ग्रामीण इलाकों की नाराज़गी और शहरी वोटर की बदलती सोच—इन सभी पर उनकी रिपोर्टिंग सीधे केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंची। यही कारण है कि (National Party Strategy) में छत्तीसगढ़ की आवाज अब और स्पष्ट सुनाई दे सकती है।
संगठन में अनुशासन, सियासत में संतुलन
छत्तीसगढ़ बीजेपी में बीते वर्षों में संगठनात्मक चुनौतियां खुलकर सामने आई थीं। नबीन के कार्यकाल में मंडल से लेकर जिला स्तर तक संवाद की प्रक्रिया को दोबारा सक्रिय किया गया। अंदरूनी मतभेदों पर सार्वजनिक बयानबाजी से बचते हुए, संगठनात्मक फैसले सख्ती से लागू किए गए। यह मॉडल अब राष्ट्रीय स्तर पर भी दिख सकता है।
राज्य को क्या मिलेगा सीधा लाभ
राष्ट्रीय अध्यक्ष का छत्तीसगढ़ से गहरा जुड़ाव होने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि राज्य के मुद्दे अब “फाइल” बनकर नहीं, बल्कि “प्राथमिकता” बनकर दिल्ली पहुंचेंगे। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की सुरक्षा, आदिवासी विकास और प्रशासनिक चुनौतियों पर पार्टी की नीति ज्यादा स्पष्ट और तेज हो सकती है।
टिकट और नेतृत्व चयन का बदला गणित
आने वाले नगरीय निकाय, पंचायत और विधानसभा चुनावों को देखते हुए यह तय माना जा रहा है कि टिकट वितरण में इस बार ज़मीनी परफॉर्मेंस को ज्यादा अहमियत मिलेगी। सिर्फ पहचान नहीं, बल्कि काम और संगठन के प्रति प्रतिबद्धता नेतृत्व चयन का आधार बन सकती है।
कांग्रेस के लिए बदली हुई चुनौती
इस बदलाव का असर विपक्ष पर भी पड़ेगा। कांग्रेस के लिए छत्तीसगढ़ में मुकाबला अब केवल राज्य नेतृत्व तक सीमित नहीं रहेगा। बीजेपी की रणनीति ज्यादा आक्रामक, ज्यादा संगठित और मुद्दों पर केंद्रित हो सकती है, जिससे राजनीतिक संघर्ष का स्तर भी ऊपर जाएगा।
छत्तीसगढ़ मॉडल, राष्ट्रीय राजनीति में प्रवेश
जिस तरह छत्तीसगढ़ में संगठन चलाने के दौरान कई प्रयोग किए गए, वही प्रयोग अब अन्य राज्यों में भी दोहराए जा सकते हैं। नबीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के साथ यह माना जा रहा है कि “छत्तीसगढ़ मॉडल” अब पार्टी की राष्ट्रीय रणनीति का हिस्सा बन सकता है।




