सीजी भास्कर, 12 फरवरी। छत्तीसगढ़ में सुधारात्मक न्याय व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि (Chhattisgarh Central Jail ISO) दर्ज की गई है। राज्य की चार केंद्रीय जेलों रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर और अंबिकापुर को अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानक ISO 9001:2015 का प्रमाणपत्र प्रदान किया गया है। यह प्रमाणन जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और मानवीय बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
यह पहल उप मुख्यमंत्री एवं जेल विभाग के प्रभारी मंत्री विजय शर्मा के निर्देश पर शुरू की गई थी। उद्देश्य था कि राज्य की जेलों में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली (Quality Management System) को लागू किया जाए। निर्धारित प्रक्रिया और मूल्यांकन के बाद यह सर्टिफिकेशन सफलतापूर्वक प्राप्त किया गया।
11 फरवरी को सौंपे गए प्रमाणपत्र
प्रमाणन प्रदान करने वाली संस्था द्वारा 11 फरवरी 2026 को केंद्रीय जेल रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर और अंबिकापुर के जेल अधीक्षकों को ISO 9001:2015 के प्रमाणपत्र (Chhattisgarh Central Jail ISO) सौंपे गए। इस उपलब्धि से जेलों के प्रशासनिक ढांचे में प्रक्रियागत एकरूपता, गुणवत्ता नियंत्रण और जवाबदेही को मजबूती मिलेगी।
बंदी कल्याण और मानवाधिकार संरक्षण पर जोर
अधिकारियों के अनुसार, ISO प्रमाणन से न केवल प्रशासनिक सुधार होंगे, बल्कि बंदी कल्याण, मानवाधिकार संरक्षण, जोखिम प्रबंधन और जेल व्यवस्था पर आमजन का भरोसा भी बढ़ेगा। इसे सुधारात्मक न्याय प्रणाली को मजबूत करने की दिशा में मील का पत्थर माना जा रहा है।
अधिकारियों और कर्मचारियों की अहम भूमिका
इस पूरी प्रक्रिया में योगेश सिंह क्षत्री (जेल अधीक्षक, केंद्रीय जेल रायपुर), खोमेश मंडावी (जेल अधीक्षक, केंद्रीय जेल बिलासपुर), मनीष संभवकर (जेल अधीक्षक, केंद्रीय जेल दुर्ग) और अक्षय सिंह राजपूत सहित रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर एवं अंबिकापुर केंद्रीय जेलों के अधिकारियों और कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
जेल प्रशासन का मानना है कि आने वाले समय में इस मॉडल को अन्य जेलों में भी लागू किया (Chhattisgarh Central Jail ISO) जा सकता है, जिससे राज्य की पूरी जेल व्यवस्था को आधुनिक और मानवीय बनाया जा सके।




