सीजी भास्कर, 15 नवंबर | Chhattisgarh Cold Wave Alert | उत्तरी इलाकों में कंपकंपी, सुबह–शाम अलाव का सहारा
छत्तीसगढ़ में ठंड का असर अचानक गहराने लगा है। अंबिकापुर में न्यूनतम तापमान 7°C रिकॉर्ड होने के बाद उत्तर और मध्य हिस्सों में शीतलहर (cold wave impact ) का असर और तेज हो गया है।
सुबह और शाम दोनों वक्त लोग अलाव पर निर्भर हैं, लेकिन कई इलाकों में सार्वजनिक स्थानों पर अलाव की कमी लोगों की दिक्कतों को बढ़ा रही है।
मैदानी जिलों में तापमान गिरा, दुर्ग–रायपुर में भी बदल रहा मौसम का मिजाज
मैदानी क्षेत्रों में भी ठंड ने रफ्तार पकड़ ली है। दुर्ग इस समय सबसे ठंडा शहर बना हुआ है, जहां रात का तापमान 10.2°C दर्ज किया गया, जो सामान्य से करीब 7 डिग्री कम है।
रायपुर में भी नवंबर के नौ साल बाद तापमान 13°C तक लुढ़क गया। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार यह गिरावट उत्तरी हवाओं के कारण हो रही है, जिससे मैदानों में भी temperature drop तेज महसूस किया जा रहा है।
पिछले 24 घंटों का रिकॉर्ड: एक तरफ 30.8°C, दूसरी तरफ 7°C
बीते 24 घंटों में प्रदेश का सबसे अधिक अधिकतम तापमान दुर्ग में 30.8°C और सबसे कम न्यूनतम तापमान अंबिकापुर में 7°C रिकॉर्ड किया गया।
तापमान में इतने बड़े अंतर से साफ है कि दिन–रात की ठंडक अचानक बढ़ चुकी है, जिससे स्वास्थ्य पर भी असर पड़ सकता है।
नवंबर का इतिहास: कभी पड़ी कड़कड़ाती ठंड, कभी टूटा गर्मी का रिकॉर्ड
नवंबर आमतौर पर छत्तीसगढ़ में हल्की–ठंडी शुरुआत का महीना माना जाता है, लेकिन मौसम विभाग के पुरानी फाइलों के अनुसार नवंबर 1935 में अधिकतम तापमान 35.6°C तक पहुंच गया था। वहीं 22 नवंबर 1883 को न्यूनतम तापमान 8.3°C दर्ज हुआ था, जो उस समय की सबसे सर्द रात मानी जाती है।
इतिहास यह भी बताता है कि नवंबर में बारिश भी रिकॉर्ड स्तर पर हुई—1924 में पूरे महीने में 138.2 मिमी बारिश दर्ज हुई, और 1930 में एक ही दिन में 70.4 मिमी।
मौजूदा मौसम पैटर्न: साफ आसमान, ठंडी हवाएं और हल्की नमी
मौसम विशेषज्ञ बताते हैं कि नवंबर के महीने में आमतौर पर आसमान साफ रहता है। ठंडी हवाओं के साथ दिन हल्के ठंडे और रातें ठंडी होने लगती हैं।
कभी–कभी बंगाल की खाड़ी या अरब सागर से आने वाले निम्न दबाव के कारण हल्की बारिश हो जाती है, जिससे तापमान ऊपर–नीचे होता है।
आम तौर पर यह महीना stable weather pattern वाला समय माना जाता है, जब बड़े तूफान या ओलावृष्टि की संभावना बेहद कम रहती है।
मलेरिया का खतरा बढ़ा, खासकर जंगल–ग्रामीण इलाकों में
Chhattisgarh Cold Wave Alert के बीच एक और चिंता सामने आई है—मलेरिया फैलने की संभावना बढ़ गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार दिन का तापमान 33–39°C और रात का तापमान 14–19°C होने पर मलेरिया के मच्छर तेजी से बढ़ते हैं। फिलहाल प्रदेश में तापमान इसी दायरे में है, जिससे malaria risk बढ़ा हुआ माना जा रहा है।
जंगल क्षेत्रों—खासकर सुकमा और दंतेवाड़ा—में यह जोखिम और ज्यादा है।
डॉक्टर्स की चेतावनी: सतर्क रहें, मौसम बदल रहा है
मेडिकल विशेषज्ञों ने कहा है कि तापमान में अचानक उतार–चढ़ाव बीमारियों को बढ़ा सकता है।
शाम के बाद मच्छरों की गतिविधि बढ़ जाती है, इसलिए घरों के आसपास पानी जमा न होने दें।
रात में मच्छरदानी, ITN या LLIN का उपयोग करें, और शरीर को ढककर रखें।
बुखार, कंपकंपी, सिरदर्द या पसीना आने जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत जांच करानी चाहिए।
ठंड में इम्यूनिटी कैसे मजबूत रखें — आसान उपाय
अदरक–तुलसी की चाय या काढ़ा
ये सभी उपाय सर्दी–खांसी और वायरल संक्रमण से बचने में मददगार हैं।
गर्म पानी से भाप लेना नाक बंद होने में राहत देता है
नमक–पानी के गरारे गले की खराश में फायदेमंद
विटामिन C युक्त आहार (संतरा, नींबू, आंवला)




