सीजी भास्कर, 06 जून : छत्तीसगढ़ में हाथियों के संरक्षण, प्रबंधन और मानव-हाथी (Chhattisgarh Elephant Conservation) संघर्ष की चुनौतियों पर मंथन के लिए दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने वर्चुअल माध्यम से कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए कहा कि राज्य में वन्यजीव संरक्षण के लिए किए जा रहे सतत प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। वर्ष 2022 में जहां प्रदेश में हाथियों की संख्या लगभग 240 थी, वहीं अब यह बढ़कर करीब 450 तक पहुंच गई है। यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ को देश के अग्रणी वन्यजीव संरक्षण राज्यों में शामिल कर रही है।
वन मंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संसाधनों, घने वनों और समृद्ध जैव विविधता से परिपूर्ण राज्य है। सरकार द्वारा हाथियों के संरक्षण, उनके सुरक्षित विचरण और वन क्षेत्रों के संरक्षण के लिए लगातार योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया जा रहा है। यही कारण है कि बीते कुछ वर्षों में हाथियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
मानव-हाथी संघर्ष बना बड़ी चुनौती
केदार कश्यप ने कहा कि हाथियों का विचरण क्षेत्र अब सरगुजा, बिलासपुर, रायगढ़, रायपुर और दुर्ग संभाग के कई जिलों तक फैल चुका है। ऐसे में वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी एक बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जनभागीदारी, तकनीकी निगरानी और वैज्ञानिक प्रबंधन के जरिए मानव-हाथी संघर्ष को कम करने की दिशा में लगातार काम कर रही है।
आधुनिक तकनीक से होगा बेहतर प्रबंधन
कार्यशाला में हाथियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य प्रबंधन को लेकर आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर विशेष जोर दिया गया। वन मंत्री ने कहा कि सरकार विशेषज्ञों के मार्गदर्शन और प्रशिक्षित मानव संसाधनों की मदद से वन्यजीव प्रबंधन को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि तकनीकी निगरानी, वैज्ञानिक अध्ययन और समयबद्ध कार्रवाई से हाथियों और मानव आबादी के बीच टकराव की घटनाओं को कम किया जा सकता है।
विशेषज्ञ देंगे वन अधिकारियों को प्रशिक्षण
कार्यशाला में देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल हुए हैं। इसमें भारतीय वन्यजीव संस्थान (देहरादून) और भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (बरेली) के वैज्ञानिक एवं विशेषज्ञ वन अधिकारियों और पशु चिकित्सकों को प्रशिक्षण दे रहे हैं। प्रशिक्षण के दौरान हाथियों के स्वास्थ्य परीक्षण, मृत्यु के कारणों की वैज्ञानिक जांच, जैविक नमूनों के संरक्षण, शव परीक्षण और स्वास्थ्य निगरानी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से जानकारी दी जाएगी।
वन्यजीव संरक्षण में नई पहचान बना रहा प्रदेश
वन मंत्री ने कहा कि इस राष्ट्रीय कार्यशाला से प्राप्त अनुभव और तकनीकी ज्ञान हाथियों के संरक्षण और प्रबंधन को और अधिक प्रभावी बनाने में मदद करेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि छत्तीसगढ़ आने वाले समय में वन्यजीव संरक्षण, वैज्ञानिक प्रबंधन और मानव-वन्यजीव सहअस्तित्व के क्षेत्र में देश के लिए एक आदर्श मॉडल के रूप में स्थापित होगा।




