सीजी भास्कर, 20 अगस्त : फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र के जरिए सरकारी नौकरी हासिल करने के आरोपों ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। अब ऐसे मामलों की जांच के लिए 186 अधिकारी-कर्मचारियों की विशेष मेडिकल जांच कराई जाएगी। इसके लिए रायपुर में विशेष मेडिकल बोर्ड गठित किया जाएगा। बोर्ड संबंधित लोगों की दिव्यांगता की चिकित्सकीय जांच कर रिपोर्ट तैयार करेगा।
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186 लोगों की होगी विशेष मेडिकल जांच
दिव्यांग प्रमाणपत्र (Chhattisgarh Fake Disability Certificate) से जुड़े मामलों की जांच के लिए गठित होने वाला मेडिकल बोर्ड संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों की वास्तविक चिकित्सकीय स्थिति की जांच करेगा। बोर्ड यह भी देखेगा कि उनके पास मौजूद प्रमाणपत्र उनकी वर्तमान दिव्यांगता की स्थिति के अनुरूप हैं या नहीं।
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के अनुसार, शिकायतों के दायरे में आए 186 लोगों की जांच रायपुर में विशेष मेडिकल बोर्ड के जरिए कराई जाएगी। सरकार की कोशिश है कि जांच प्रक्रिया निर्धारित समय में पूरी कर रिपोर्ट तैयार की जाए।
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7 डिप्टी कलेक्टर भी जांच के दायरे में
सामने आई सूची में अलग-अलग सरकारी विभागों और पदों पर कार्यरत अधिकारी-कर्मचारियों के नाम शामिल बताए गए हैं। इनमें CGPSC से चयनित 7 डिप्टी कलेक्टर भी शामिल हैं।
इसके अलावा 3 नायब तहसीलदार, 3 लेखाधिकारी, 3 पशु चिकित्सक और 2 सहकारिता निरीक्षकों के नाम भी सूची में होने की जानकारी सामने आई है। अब इन सभी की मेडिकल जांच के बाद ही प्रमाणपत्रों की वास्तविकता को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी।
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65 ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों के नाम
जांच के दायरे में 65 ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी भी बताए जा रहे हैं। इनके अलावा व्याख्याता और शिक्षक भी सूची में शामिल हैं। 13 उपअभियंता और 24 ग्रामीण उद्यान विस्तार अधिकारियों के नाम होने की जानकारी सामने आई है। कुछ अन्य अधिकारी, जिनमें प्रभारी मुख्य कार्यपालन अधिकारी जैसे पदों से जुड़े लोग शामिल हैं, उनके मामलों की भी जांच की जाएगी।
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दिव्यांगता की होगी भौतिक और चिकित्सकीय जांच
सरकार की बैठक में संबंधित मामलों की समीक्षा के साथ दिव्यांगता की भौतिक और चिकित्सकीय जांच पर भी चर्चा हुई। संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों को निर्धारित समय पर मेडिकल बोर्ड के सामने उपस्थित कराया जाएगा। Chhattisgarh Fake Disability Certificate (फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र) के मामलों में जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि संबंधित व्यक्ति की वास्तविक चिकित्सकीय स्थिति उसके प्रमाणपत्र में दर्ज दिव्यांगता से मेल खाती है या नहीं।
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सरकार ने शिकायतों के बाद लिया फैसला
फर्जी प्रमाणपत्रों के इस्तेमाल की शिकायतें लंबे समय से सामने आती रही हैं। छत्तीसगढ़ दिव्यांग सेवा संघ की ओर से भी सरकार को ज्ञापन सौंपकर मामले में कार्रवाई की मांग की गई थी। इसके बाद स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल और महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े की संयुक्त बैठक में विशेष मेडिकल बोर्ड गठित करने का निर्णय लिया गया। सरकार अब शिकायतों के दायरे में आए सभी मामलों की चिकित्सकीय जांच कराना चाहती है, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
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मेडिकल रिपोर्ट के बाद होगी आगे की कार्रवाई
विशेष मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट सामने आने के बाद आगे की कार्रवाई का रास्ता साफ होगा। यदि जांच में किसी अधिकारी-कर्मचारी का दिव्यांग प्रमाणपत्र (Chhattisgarh Fake Disability Certificate) फर्जी, गलत या निर्धारित नियमों के विपरीत पाया जाता है, तो उसके खिलाफ लागू नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
फिलहाल सरकार ने मेडिकल जांच की प्रक्रिया को प्राथमिकता दी है। 186 अधिकारी-कर्मचारियों की जांच के बाद सामने आने वाली रिपोर्ट से ही यह स्पष्ट होगा कि कितने मामलों में प्रमाणपत्रों को लेकर वास्तविक गड़बड़ी पाई जाती है।
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