सीजी भास्कर, रायपुर, 25 अक्टूबर। छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य विभाग में डॉक्टरों और कर्मचारियों की मनमानी ऑनलाइन हाजिरी पर रोक लगाने की तैयारी की जा रही है। अगले महीने से ऑनलाइन हाजिरी व्यवस्था (Chhattisgarh Health Department Attendance) को ट्रेजरी सिस्टम से जोड़ने की योजना है। इसके बाद डॉक्टरों और कर्मचारियों को अपनी मूल पदस्थापना वाली जगह से ही ऑनलाइन हाजिरी लगानी होगी। दूसरी जगह से दर्ज की गई उपस्थिति मान्य नहीं होगी और अनुपस्थित रहने पर वेतन कटौती की कार्रवाई की जा सकेगी।
यह भी पढ़ें : Chhattisgarh OTS-2 Scheme : छत्तीसगढ़ में सस्ते मकान खरीदने का मौका! 1,659 संपत्तियां बिकीं, अब भी 997 बाकी
ट्रेजरी से जुड़ेगा हाजिरी सॉफ्टवेयर
स्वास्थ्य विभाग में फिलहाल ऑनलाइन हाजिरी की व्यवस्था लागू है, लेकिन इसका सॉफ्टवेयर ट्रेजरी सिस्टम से जुड़ा नहीं है। इसी वजह से दूसरी जगह अटैच होकर काम कर रहे डॉक्टरों और कर्मचारियों के वेतन पर इसका असर नहीं पड़ रहा है।
अब राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) के माध्यम से स्वास्थ्य संचालनालय में हाजिरी सिस्टम को अपडेट करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। उपस्थिति दर्ज करने की व्यवस्था (Chhattisgarh Health Department Attendance) ट्रेजरी से जुड़ने के बाद उपस्थिति और वेतन प्रणाली आपस में जुड़ जाएगी। इससे मूल पदस्थापना से अलग जगह काम करने वाले कर्मचारियों पर कार्रवाई करना आसान होगा।
पंडरी अस्पताल में तीन नेत्र सहायक अटैच
रायपुर के पंडरी अस्पताल में तीन नेत्र सहायकों को अटैच किया गया है, जबकि वहां इस पद के लिए जगह ही नहीं है। अस्पताल में आंखों की जांच और इलाज की सुविधा भी नहीं है, क्योंकि माना में अलग नेत्र अस्पताल संचालित है। इसके बावजूद इन कर्मचारियों को उनकी मूल पदस्थापना पर वापस नहीं भेजा गया है।
रायपुर में तीन डॉक्टर भी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) कार्यालय में अटैच बताए गए हैं। इनके अलावा नेत्र सहायक, वार्ड बॉय, स्वीपर और आया बाई जैसे कर्मचारी भी दूसरे संस्थानों में काम कर रहे हैं।
दूसरे जिलों में भी अटैचमेंट
धमतरी, जगदलपुर, महासमुंद और दुर्ग में भी डॉक्टरों तथा तकनीकी कर्मचारियों को सीएमएचओ कार्यालयों में अटैच किए जाने की जानकारी सामने आई है। इससे अस्पतालों में मरीजों के इलाज और स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका जताई गई है।
यह भी पढ़ें : Dhoni IPL 2027 Playing Decision : IPL 2027 से पहले एमएस धोनी लेंगे बड़ा फैसला, दिसंबर से पहले साफ होगी खेलने की तस्वीर
आदेश के बाद भी अमल नहीं
स्वास्थ्य विभाग में अटैचमेंट खत्म करने की घोषणा विधानसभा में पहले ही की जा चुकी है। इसके बावजूद व्यवस्था में बदलाव नहीं होने पर स्वास्थ्य संचालनालय ने 22 सितंबर को दोबारा पत्र जारी किया था। इसमें फरवरी-मार्च 2026 में दिए गए आश्वासनों के पालन का प्रमाण तीन दिन के भीतर उपलब्ध कराने और देरी होने पर कारण बताने के निर्देश दिए गए थे।
आदेश जारी होने के करीब एक महीने बाद भी अटैचमेंट की स्थिति बनी हुई है। विभाग में स्टाफ की कमी दूर करने के नाम पर डॉक्टरों और पैरामेडिकल कर्मचारियों को दूसरे कार्यालयों में अटैच किया जा रहा है।
यह भी पढ़ें : BSP Privatization Row : BSP निजीकरण पर BJP-कांग्रेस में जुबानी जंग तेज, भूपेश बघेल पर सांसद के बयान से सियासी विवाद
मरीजों के इलाज पर असर
जानकारी के मुताबिक, कई डॉक्टर और कर्मचारी अपनी मूल पदस्थापना के बजाय कार्यालयों में काम कर रहे हैं। इससे डॉक्टरों का समय मरीजों के इलाज के बजाय दफ्तरों के काम में खर्च हो रहा है। वहीं, वार्ड बॉय, स्वीपर और आया बाई जैसे कर्मचारियों से भी उनके मूल कार्यस्थल के बजाय दूसरे संस्थानों में काम लिया जा रहा है।
नई ऑनलाइन अटेंडेंस प्रणाली (Chhattisgarh Health Department Attendance) लागू होने के बाद विभाग को उम्मीद है कि अटैचमेंट से जुड़ी अनियमितताओं पर नियंत्रण लगेगा और डॉक्टरों व कर्मचारियों की उपस्थिति की निगरानी अधिक प्रभावी ढंग से की जा सकेगी।
यह भी पढ़ें : Durg News : दुर्ग में दो दिन में नदी-नहर से मिले दो शव, एक नदी में कूदा तो दूसरा बाइक समेत गिरा



