Chhattisgarh Liquor Scam : छत्तीसगढ़ के चर्चित शराब घोटाला मामले की जांच कर रही आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने दुर्ग जिले में एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। जांच एजेंसी ने अवैध शराब के परिवहन में संलिप्त तीन वाहनों को अपने कब्जे में लिया है। बताया जा रहा है कि ये वाहन एक निजी डिस्टिलरी से संबद्ध थे और इनका उपयोग गैर-कानूनी तरीके से शराब की खेप ठिकाने लगाने के लिए किया जाता था।
सरकारी दुकानों तक सीधी अवैध सप्लाई का खुलासा
जांच के दौरान यह चौंकाने वाली बात सामने आई है कि इन वाहनों के जरिए अवैध शराब को सीधे सरकारी मदिरा दुकानों तक पहुंचाया जा रहा था। डिस्टिलरी संचालक अपने बेहद करीबी और भरोसेमंद लोगों के माध्यम से छोटे ट्रांसपोर्टरों की गाड़ियों का इस्तेमाल कर इस पूरे खेल को अंजाम दे रहे थे। शराब को बिना किसी रुकावट के चुनिंदा दुकानों तक पहुंचाने के लिए कुछ खास वाहनों को ही बार-बार रूट पर तैनात किया जाता था।
डिजिटल और भौतिक साक्ष्यों से पुख्ता हुए आरोप
जांच एजेंसी ने इस पूरे सिंडिकेट को बेनकाब करने के लिए डिजिटल डेटा और भौतिक सबूतों का सहारा लिया है। गवाहों के बयानों और उपलब्ध रिकॉर्ड से यह साफ हो गया है कि इस नेटवर्क में केवल ये तीन गाड़ियां ही नहीं, बल्कि कई अन्य वाहन भी शामिल रहे हैं। ईओडब्ल्यू की टीम अब उन अन्य संदिग्ध वाहनों की सूची तैयार कर रही है जो इस संगठित अपराध का हिस्सा थे।
सबूत मिटाने के लिए गाड़ियों को स्क्रैप करने की आशंका
शराब घोटाले में यह पहली कार्रवाई नहीं है; इससे पहले भी विभिन्न डिस्टिलरियों से जुड़े कई वाहनों को जब्त किया जा चुका है। जांच अधिकारियों को इस बात का भी अंदेशा है कि पकड़े जाने के डर से कुछ रसूखदारों ने सबूत मिटाने के उद्देश्य से अवैध सप्लाई में इस्तेमाल पुरानी गाड़ियों को कबाड़ (स्क्रैप) में बेच दिया है या उनका स्वरूप बदल दिया है।
जांच के दायरे में आएंगे सिंडिकेट के कई बड़े चेहरे
फिलहाल ईओडब्ल्यू इस पूरे नेटवर्क की गहराई से पड़ताल कर रही है। अधिकारियों ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वाहनों की जब्ती के बाद अब उन लोगों की पहचान की जा रही है जिनके इशारे पर यह अवैध परिवहन संचालित हो रहा था। जांच एजेंसी का कहना है कि आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़े कई अन्य प्रभावशाली व्यक्तियों के खिलाफ कठोर कानूनी कदम उठाए जाएंगे।


