सीजी भास्कर, 10 अप्रैल। सुकमा के जंगलों से निकलकर समाज की मुख्यधारा में लौटने वाले युवाओं के जीवन में अब एक बड़ा संवैधानिक बदलाव (Chhattisgarh Naxal Rehabilitation) आया है। जिला प्रशासन ने नक्सलवाद का रास्ता छोड़ चुके 116 युवाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बनाते हुए उनके मतदाता परिचय पत्र तैयार किए हैं।
यह कदम महज एक सरकारी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि उन युवाओं के लिए एक नई पहचान है जो कभी व्यवस्था से दूर रहकर संघर्ष कर रहे थे। अब ये युवा न केवल अपने प्रतिनिधि को चुनेंगे, बल्कि भविष्य में खुद भी जनसेवा के लिए चुनावी मैदान में उतरने की योग्यता हासिल कर चुके हैं। प्रशासन की यह पहल बस्तर के सुदूर इलाकों में लोकतंत्र की जड़ों को और गहरा करने वाली साबित हो रही है।
दस्तावेजों से मिली पहचान और सरकारी योजनाओं का साथ (Chhattisgarh Naxal Rehabilitation)
पुनर्वास केंद्र में रह रहे इन युवाओं को समाज में सम्मानजनक स्थान दिलाने के लिए प्रशासन ने चौतरफा रणनीति पर काम किया है। मतदाता पहचान पत्र के साथ-साथ इन सभी 116 हितग्राहियों के आधार कार्ड, आयुष्मान कार्ड, राशन कार्ड और श्रम कार्ड भी बनवाए गए हैं।
इतना ही नहीं, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत इनका सर्वे कार्य भी पूरा कर लिया (Chhattisgarh Naxal Rehabilitation) गया है ताकि इनके पास अपना पक्का घर हो। इन दस्तावेजों के बन जाने से अब इन युवाओं को सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और शासन की हर छोटी-बड़ी कल्याणकारी योजना का लाभ सीधे इनके बैंक खातों और चौखट तक पहुँच सकेगा।
कौशल विकास से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम
बदलाव की यह कहानी सिर्फ कागजों और पहचान पत्रों तक सीमित (Chhattisgarh Naxal Rehabilitation) नहीं है, बल्कि इसे आर्थिक मजबूती देने के लिए बड़े पैमाने पर कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। पुनर्वासित युवाओं को हुनरमंद बनाने के लिए कृषि, राजमिस्त्री, सिलाई और वाहन चलाने जैसे कामों की ट्रेनिंग दी जा रही है।
आंकड़ों के मुताबिक, अब तक कुल 317 युवा अलग-अलग विधाओं में प्रशिक्षित होकर आत्मनिर्भर बनने की राह पर हैं। इनमें से बड़ी संख्या में युवा खेती और राजमिस्त्री के काम में अपनी रुचि दिखा रहे हैं, वहीं कुछ मुर्गी पालन और सिलाई के जरिए स्वरोजगार की ओर कदम बढ़ा चुके हैं। यह बदलाव इस बात का प्रमाण है कि हिंसा का रास्ता छोड़ने के बाद ये युवा अब निर्माण की नई भाषा सीख रहे हैं।


