सीजी भास्कर, 16 जनवरी | Chhattisgarh Naxal Surrender : छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियान को बड़ी सफलता मिली है। बीते 48 घंटों के भीतर 81 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर लोकतांत्रिक व्यवस्था में लौटने का फैसला लिया है। यह घटनाक्रम न केवल सुरक्षा रणनीति की मजबूती को दर्शाता है, बल्कि माओवादी संगठनों के भीतर बढ़ते असंतोष की भी साफ तस्वीर पेश करता है।
इनामी कैडरों ने बदला रास्ता, हिंसा को कहा अलविदा
‘पूना मारगेम’ अभियान के तहत साउथ सब-ज़ोनल ब्यूरो से जुड़े 52 सक्रिय माओवादी कैडरों ने हथियार डाल दिए। इन सभी पर कुल 1.41 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। लंबे समय तक संगठन की रीढ़ माने जाने वाले इन कैडरों का आत्मसमर्पण माओवादी ढांचे के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
48 घंटे में 81 आत्मसमर्पण, निर्णायक मोड़ पर अभियान
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इसे हिंसा की राजनीति पर विश्वास की निर्णायक जीत बताया। उन्होंने कहा कि सिर्फ दो दिनों में 81 नक्सलियों का आत्मसमर्पण यह संकेत देता है कि माओवाद अब बिखराव की अंतिम अवस्था में पहुंच चुका है। यह बदलाव अचानक नहीं, बल्कि निरंतर दबाव और भरोसे का नतीजा है।
बस्तर में टूटा डर का ढांचा, बढ़ा शासन पर भरोसा
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर अंचल में अब माओवादी संगठन के साथ-साथ उसकी डर और भ्रम पर आधारित विचारधारा भी कमजोर पड़ चुकी है। जहां पहले दबाव और भय का माहौल था, वहां अब सुरक्षा बलों की सक्रिय मौजूदगी, प्रशासन की पहुंच और विकास योजनाओं ने लोगों का भरोसा जीता है।
सरकार द्वारा चलाए जा रहे पुनर्वास और पुनर्जीवन अभियान के तहत आत्मसमर्पण करने वाले युवाओं को सम्मानजनक जीवन, सुरक्षा और आजीविका के अवसर दिए जा रहे हैं। यही कारण है कि भटके हुए युवा अब हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने को तैयार हो रहे हैं।
बंदूक नहीं, विकास ही भविष्य है: CM साय
मुख्यमंत्री साय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि छत्तीसगढ़ में अब हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है। उन्होंने बताया कि सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के विस्तार ने बस्तर में भविष्य की नई तस्वीर गढ़नी शुरू कर दी है। डर की जगह अब उम्मीद और स्थायित्व आकार ले रहा है।
नक्सल-मुक्त लक्ष्य की ओर तेज़ कदम
मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर नक्सलवाद के खात्मे का लक्ष्य अब निर्णायक चरण में है। छत्तीसगढ़ में लगातार मिल रही सफलताएं इस बात का प्रमाण हैं कि रणनीति, संवाद और विकास—तीनों मिलकर हिंसा की जड़ों को खत्म कर रहे हैं।


