सीजी भास्कर, 20 जनवरी। छत्तीसगढ़ पुलिस ने ऑनलाइन सट्टे के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए हरियाणा के गुरुग्राम में संचालित एक अंतरराज्यीय ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई में पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो मोबाइल एप और वेबसाइट के जरिए क्रिकेट, फुटबॉल, कैसीनो गेम और लाइव मैचों पर सट्टा खिलवा रहे थे।
पुलिस जांच में सामने आया कि यह नेटवर्क ‘शिवा बुक’ नाम के ऑनलाइन सट्टा एप के जरिए संचालित (Chhattisgarh Online Betting) हो रहा था। पुलिस और साइबर एजेंसियों से बचने के लिए आरोपी समय-समय पर एप और पैनल का नाम बदलते रहते थे और इसे ‘100 पैनल’ व ‘फेयर प्ले’ जैसे नामों से चलाया जा रहा था, ताकि यह एक सामान्य ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म जैसा लगे।
सोशल मीडिया से फंसाते थे लोग
जांच में यह भी सामने आया कि सट्टा एजेंट व्हाट्सऐप, टेलीग्राम, इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों को जोड़ते थे। शुरुआत में यूजर्स को आईडी-पासवर्ड देकर छोटे फायदे दिखाए जाते थे, जिससे भरोसा बन सके। बाद में दांव की रकम बढ़ाई जाती थी और यूजर्स धीरे-धीरे इस डिजिटल जुए के जाल में फंसते चले जाते थे।
करोड़ों का लेनदेन, म्यूल खातों का इस्तेमाल
पुलिस को जांच के दौरान 8 से 10 करोड़ रुपये के संदिग्ध बैंक लेनदेन के सबूत (Chhattisgarh Online Betting) मिले हैं। आरोपी अलग-अलग राज्यों के लोगों के नाम पर बैंक खाते खुलवाकर उनमें रकम मंगवाते थे और बाद में पैसे को कई खातों में घुमाकर असली स्रोत छुपा देते थे।
गुरुग्राम से पकड़ी गई अहम कड़ी
इससे पहले खैरागढ़ पुलिस ने छुईखदान थाना क्षेत्र से 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर यह पता चला कि इस नेटवर्क की एक अहम ब्रांच गुरुग्राम में संचालित हो रही है। इसके बाद पुलिस टीम ने वहां दबिश देकर पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया।
नकदी, मोबाइल और बैंक खाते जब्त
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से नकद राशि, कई मोबाइल फोन, लैपटॉप, एटीएम कार्ड, सिम कार्ड और वाई-फाई उपकरण जब्त (Chhattisgarh Online Betting) किए हैं। इसके साथ ही ऑनलाइन सट्टे में इस्तेमाल किए जा रहे सात बैंक खातों को भी सीज किया गया है।
ऑनलाइन सट्टा है गंभीर अपराध
पुलिस का कहना है कि ऑनलाइन सट्टा छत्तीसगढ़ जुआ प्रतिषेध अधिनियम, आईटी एक्ट और भारतीय न्याय संहिता के तहत गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। यह न सिर्फ आर्थिक नुकसान पहुंचाता है, बल्कि युवाओं को कर्ज, तनाव और अपराध की ओर धकेलता है।




