सीजी भास्कर. 19 जनवरी। छत्तीसगढ़ प्रदेश साहू संघ की राजधानी में आयोजित प्रदेश स्तरीय बैठक में समाज के भविष्य और सामाजिक मूल्यों को लेकर गहन मंथन (Chhattisgarh Sahu Samaj) किया गया।
बैठक की अध्यक्षता प्रदेश अध्यक्ष डॉ. नीरेंद्र साहू ने की, जिसमें प्रदेशभर से जिला इकाइयों के पदाधिकारी शामिल हुए। लंबे विचार-विमर्श के बाद सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि साहू समाज में अब प्री-वेडिंग शूट जैसी दिखावटी परंपराओं को प्रोत्साहित नहीं किया जाएगा।
बैठक में यह बात प्रमुखता से सामने आई कि बीते कुछ वर्षों में विवाह जैसे पवित्र संस्कारों में अनावश्यक खर्च और सामाजिक दबाव लगातार बढ़ा है। संघ के पदाधिकारियों ने माना कि इससे न केवल आर्थिक बोझ बढ़ रहा है, बल्कि समाज की पारंपरिक सादगी भी प्रभावित हो रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया कि विवाह संस्कार को दिखावे से मुक्त रखा जाए।
प्रदेश साहू संघ ने यह भी स्पष्ट किया कि समाज की पहचान उसकी संस्कृति, आपसी सहयोग और संस्कारों (Chhattisgarh Sahu Samaj) से होती है, न कि बाहरी प्रदर्शन से। संघ ने सभी सामाजिक इकाइयों से इस निर्णय का पालन सुनिश्चित करने की अपील की है, ताकि आने वाली पीढ़ियों को संतुलित और मूल्य-आधारित सामाजिक वातावरण मिल सके।
बैठक में पारिवारिक विघटन और आपसी तनाव जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। इस दौरान यह तय किया गया कि समाज के भीतर पारिवारिक काउंसलिंग और संवाद को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे रिश्तों में समझ और स्थायित्व बना रहे। पदाधिकारियों ने कहा कि सामाजिक मजबूती का आधार मजबूत परिवार होते हैं।
प्रदेश साहू संघ ने अंत में यह संदेश (Chhattisgarh Sahu Samaj) दिया कि समाज को कमजोर करने वाली प्रवृत्तियों से दूरी बनाकर, एकजुटता और अनुशासन के साथ आगे बढ़ना ही समय की मांग है। बैठक में मौजूद सभी प्रतिनिधियों ने समाजहित में लिए गए निर्णयों को ज़मीन पर उतारने का संकल्प लिया।




