सीजी भास्कर 17 सितंबर दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद गैंगस्टर छोटा राजन को लेकर एक अहम फैसला सामने आया है। Supreme Court ने Chhota Rajan Jayashetty Murder Case में उसकी सजा पर लगी रोक को हटाते हुए साफ कर दिया कि अगर आरोपी किसी अस्थायी जमानत या पैरोल पर है, तो तुरंत सरेंडर करे। अदालत ने बॉम्बे हाईकोर्ट से यह भी पूछा कि आखिरकार चार मामलों में दोषी ठहराए जाने के बावजूद सजा पर रोक क्यों लगाई गई थी।
क्या था Jayashetty Murder Case?
साल 2001 में मुंबई के ग्रांट रोड पर गोल्डन क्राउन होटल की मालकिन जया शेट्टी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। जांच में सामने आया कि डॉन Chhota Rajan ने फोन पर जया शेट्टी से पैसों की मांग की थी, लेकिन उन्होंने किसी भी तरह का समझौता करने से मना कर दिया। इसके बाद गैंगस्टर के इशारे पर शूटर्स ने जया शेट्टी पर फायरिंग की और मौके पर ही उनकी मौत हो गई।
सुरक्षा हटने के बाद हुई वारदात
हत्या से दो महीने पहले तक जया शेट्टी को पुलिस सुरक्षा दी गई थी। लेकिन, उनके खुद के अनुरोध पर यह सुरक्षा हटा ली गई थी। इसके बाद मौका पाकर आरोपियों ने Jayashetty Murder Case को अंजाम दिया।
छोटा राजन पर कितने केस दर्ज?
डॉन छोटा राजन पर कुल 71 मामले दर्ज हैं। सुनवाई के दौरान उसके वकील ने तर्क दिया कि इनमें से 47 मामलों में कोई ठोस सबूत नहीं मिले। बावजूद इसके, Special CBI Court ने 2015 में आरोपी को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। उस समय छोटा राजन को इंडोनेशिया से गिरफ्तार कर भारत लाया गया था और तभी से वह तिहाड़ जेल में बंद है।
सुप्रीम कोर्ट का रुख और आगे की कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा दी गई राहत उचित नहीं थी। अदालत का कहना है कि जब चार मामलों में दोष सिद्ध हो चुका है, तब सजा पर रोक किसी भी तरह न्यायसंगत नहीं ठहराई जा सकती। फिलहाल, इस आदेश के बाद छोटा राजन के लिए कानूनी मुश्किलें और बढ़ गई हैं।





