सीजी भास्कर, 13 दिसंबर | Coal Scam Chhattisgarh : छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कोयला घोटाले में लंबे समय से फरार चल रहे चार्टर्ड अकाउंटेंट राकेश कुमार जैन को आखिरकार आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा ने गिरफ्तार कर लिया। आरोप है कि जैन ने फर्जी कंपनियों और हवाला नेटवर्क के जरिए अवैध कोल वसूली की रकम को मुख्य आरोपियों तक पहुंचाने की पूरी व्यवस्था संभाली थी।
कोर्ट पहुंचते ही हुई गिरफ्तारी, 8 दिन की रिमांड
शुक्रवार को रायपुर स्थित विशेष अदालत में पेशी के दौरान जांच एजेंसी ने राकेश जैन को हिरासत में लिया। अदालत में प्रस्तुत करने के बाद न्यायालय ने आरोपी को 8 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है, ताकि पैसों के लेन-देन और नेटवर्क की परतें खोली जा सकें।
फर्जी कंपनियों से कैश तैयार कर भेजे गए 50 करोड़
जांच में सामने आया है कि राकेश जैन ने दर्जनों शेल कंपनियों के जरिए करोड़ों रुपये का फर्जी खर्च दिखाया। इसी प्रक्रिया से लगभग 50 करोड़ रुपये नकद में बदले गए, जिन्हें कोयला वसूली के मुख्य चेहरे सूर्यकांत तिवारी तक पहुंचाया गया। इस पूरे खेल में जैन कमीशन के रूप में मोटी रकम रखता था।
हवाला और एंट्री सिस्टम से घोटाले को दी मजबूती
सूत्रों के अनुसार, जैन ने हवाला नेटवर्क और एंट्री ऑपरेटरों का इस्तेमाल कर अवैध रकम को अलग-अलग खातों से घुमाया। कागजों में सब कुछ वैध दिखाया गया, लेकिन असल में पैसा कोल ट्रांसपोर्ट और परमिट सिस्टम से वसूला गया था।
दूसरे घोटालों में भी निभाई अहम भूमिका
जांच एजेंसी को यह भी संकेत मिले हैं कि राकेश जैन ने अन्य बड़े आर्थिक मामलों में भी रकम को “व्हाइट” बनाने की प्रक्रिया में भूमिका निभाई। इसके लिए फर्जी दस्तावेज, नकली लेन-देन और एंट्री सिस्टम का सहारा लिया गया।
शेयर मार्केट निवेश के नाम पर ठगी का आरोप
पेशे से CA होने के बावजूद राकेश जैन पर यह भी आरोप है कि उसने कई लोगों को शेयर मार्केट में भारी मुनाफे का झांसा देकर करोड़ों रुपये की ठगी की। इस तरह के मामलों में उसके खिलाफ अलग-अलग थानों में कई केस दर्ज हैं।
साले और करीबियों के नाम पर बनाई गईं 12 से ज्यादा कंपनियां
जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी ने अपने और अपने साले के नाम पर 12 से अधिक कंपनियां खड़ी कीं। इसके अलावा कर्मचारियों और जान-पहचान वालों के नाम पर भी फर्जी फर्म बनाई गईं, जिनका इस्तेमाल केवल अवैध लेन-देन के लिए किया गया।
570 करोड़ से ज्यादा की अवैध वसूली की जांच जारी
जांच एजेंसियों का दावा है कि छत्तीसगढ़ में कोयला परिवहन और परमिट प्रक्रिया में हेरफेर कर 570 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध वसूली की गई। इस मामले में अब तक कई बड़े नामों पर कार्रवाई हो चुकी है और आगे की जांच जारी है।
परमिट सिस्टम से जुड़ा था पूरा खेल
आरोप है कि कोयला परिवहन से जुड़े परमिट को जानबूझकर ऑफलाइन किया गया, जिससे व्यापारियों से प्रति टन वसूली की जा सके। इसी पैसे को अलग-अलग चैनलों से घुमाकर सिस्टम में वापस डाला गया।
अब नेटवर्क के बाकी चेहरों पर नजर
जांच एजेंसी का फोकस अब उस पूरे नेटवर्क पर है, जिसने कोयला घोटाले को जमीन से लेकर शीर्ष तक संचालित किया। राकेश जैन की गिरफ्तारी को इस मामले में एक अहम कड़ी माना जा रहा है।





