सीजी भास्कर, 16 दिसंबर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित 570 करोड़ रुपये के कोल लेवी घोटाले (Coal Scam Chhattisgarh) में एक और बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। इस मामले में आरोपी जयचंद कोशले ने तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उपसचिव रही सौम्या चौरसिया के लिए करीब सात से आठ करोड़ रुपये की अवैध वसूली की थी। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने सोमवार को विशेष कोर्ट में करीब एक हजार पन्नों का आरोप पत्र दाखिल किया है। जयचंद कोशले फिलहाल रायपुर सेंट्रल जेल में बंद है।
ईओडब्ल्यू की जांच में सामने आया है कि जयचंद कोशले उर्फ जय, सौम्या चौरसिया का बेहद करीबी और उनका निज सहायक था। कोल लेवी के नाम पर की जा रही अवैध वसूली की रकम का वह मुख्य रिसीवर और अहम मध्यस्थ था। एजेंसी के अनुसार, अवैध वसूली से प्राप्त नकद रकम को लेना, सुरक्षित रखना और फिर उसे सौम्या चौरसिया तक पहुंचाना जयचंद की जिम्मेदारी थी।
जांच के दौरान जब्त की गई एक महत्वपूर्ण डायरी में ‘जय’ नाम से दर्ज सभी एंट्रियां जयचंद कोशले और सौम्या चौरसिया से संबंधित पाई गई हैं। इन प्रविष्टियों से साफ है कि कोल लेवी से जुड़ा पूरा अवैध नेटवर्क जयचंद के जरिए संचालित किया जा रहा था। ईओडब्ल्यू का दावा है कि जयचंद इस पूरे अपराध सिंडिकेट की एक अनिवार्य और केंद्रीय कड़ी था।
सात से आठ करोड़ की अवैध रकम की वसूली
ईओडब्ल्यू की रिपोर्ट के अनुसार, जयचंद कोशले ने सौम्या चौरसिया के निर्देश पर सूर्यकांत तिवारी के निवास समेत अन्य स्थानों से नकद राशि प्राप्त की। इसके बाद यह रकम कभी मनीष उपाध्याय को सौंपी गई, तो कभी सौम्या द्वारा बताए गए अन्य व्यक्तियों तक पहुंचाई गई। अब तक की जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि जयचंद ने लगभग 7 से 8 करोड़ रुपये की अवैध रकम सौम्या चौरसिया (Coal Scam Chhattisgarh) के लिए वसूली।
डिजिटल साक्ष्य और व्हाट्सएप ग्रुप से हुआ खुलासा
सूर्यकांत तिवारी और अन्य आरोपितों के मोबाइल फोन से जब्त डिजिटल साक्ष्यों में कोल लेवी का पूरा हिसाब-किताब मिला है। इसके लिए बनाए गए व्हाट्सएप ग्रुप में ‘जय’ नाम से दर्ज रियल-टाइम एंट्रियां जयचंद की संलिप्तता को मजबूती से साबित करती हैं। इसके अलावा पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा और सौम्या चौरसिया के बीच हुए चैट्स से यह भी सामने आया है कि जयचंद, सौम्या के निर्देश पर गोपनीय दस्तावेज और अहम फाइलें अनिल टुटेजा तक पहुंचाता था।
नगर निगम से मुख्यमंत्री सचिवालय तक जयचंद का सफर
ईओडब्ल्यू के अनुसार, जयचंद कोशले मूल रूप से नगर निगम का कर्मचारी था। जब सौम्या चौरसिया रायपुर नगर निगम में अपर आयुक्त थीं, तब जयचंद उनका निज सहायक बना। बाद में जब सौम्या मुख्यमंत्री की उपसचिव नियुक्त हुईं, तब जयचंद की पोस्टिंग भी वहीं करा दी गई। वह सौम्या के कार्यालय से जुड़ा पूरा कामकाज देखता था, जिसमें पैसे का लेन-देन और निवेश भी शामिल था। सरकार बदलने के बाद भी जयचंद ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बंगले में अपनी पोस्टिंग करा ली थी और वहीं उनका कार्य देख रहा था।


