सीजी भास्कर, 15 जनवरी। उत्तर छत्तीसगढ़ में ठंड ने एक बार फिर तीखा रुख (Cold Wave Alert North Chhattisgarh) अपना लिया है। मौसम विभाग के अनुसार अगले 48 घंटे प्रदेश के उत्तरी हिस्से के लिए सबसे ज्यादा सर्द साबित हो सकते हैं। कोरिया, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, सूरजपुर, बलरामपुर, सरगुजा और जशपुर जिलों के एक-दो क्षेत्रों में शीतलहर चलने की चेतावनी जारी की गई है।
हालांकि पूरे प्रदेश में न्यूनतम तापमान में फिलहाल कोई बड़ा उतार-चढ़ाव नहीं देखा जाएगा, लेकिन इस ठंडे दौर के बाद मौसम में धीरे-धीरे बदलाव आने के संकेत हैं। अगले तीन दिनों में न्यूनतम तापमान 1 से 3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है, जिससे लोगों को राहत मिलेगी।
बीते 24 घंटों की बात करें तो सबसे अधिक अधिकतम तापमान 29.7 डिग्री सेल्सियस जगदलपुर में दर्ज (Cold Wave Alert North Chhattisgarh) किया गया, जबकि उत्तर छत्तीसगढ़ का अंबिकापुर सबसे ठंडा रहा, जहां न्यूनतम तापमान 4.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।
क्यों बढ़ गई अचानक ठंड? मौसम का विज्ञान समझिए
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, हाल के दिनों में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टर्बेंस) ने उत्तर भारत और हिमालयी क्षेत्रों से ठंडी हवाओं को दक्षिण की ओर धकेला (Cold Wave Alert North Chhattisgarh) है। ऊपरी वायुमंडल में तेज रफ्तार जेट स्ट्रीम इन ठंडी हवाओं को तेजी से मध्य भारत की तरफ ले आती है।
इस प्रक्रिया का असर यह होता है कि रात के तापमान में तेजी से गिरावट आती है, सुबह और शाम की ठंड ज्यादा चुभने लगती है और कुछ इलाकों में शीतलहर जैसी स्थिति बन जाती है।
अगर आसान भाषा में समझें तो यह ऐसा है जैसे ठंडे फ्रिज का दरवाजा खुला रह जाए और सामने पंखा चलने लगे—ठंडी हवा दूर-दूर तक फैल जाती है। यहां फ्रिज की भूमिका पश्चिमी विक्षोभ निभा रहा है और पंखे की तरह जेट स्ट्रीम ठंडी हवा को छत्तीसगढ़ तक पहुंचा रही है।
किन इलाकों में ज्यादा असर
उत्तर छत्तीसगढ़ के पहाड़ी और वनांचल क्षेत्र, जहां रात में हवा की गति कम होती है, वहां ठंड का असर ज्यादा महसूस किया जा रहा है। खुले इलाकों में तापमान तेजी से गिर रहा है।
बच्चों की सेहत पर दिख रहा ठंड का असर
लगातार पड़ रही कड़ाके की ठंड का असर बच्चों की सेहत पर भी साफ नजर आने (Cold Wave Alert North Chhattisgarh) लगा है। बीते एक महीने में राजधानी रायपुर के अंबेडकर अस्पताल समेत निजी अस्पतालों में हाइपोथर्मिया के 400 से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं।
बाल रोग विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों का शरीर वयस्कों की तुलना में तेजी से ठंडा होता है। नवजात शिशुओं की मांसपेशियां पूरी तरह विकसित नहीं होतीं, जिससे वे ठंड का सामना नहीं कर पाते। खासतौर पर सिजेरियन डिलीवरी से जन्मे बच्चों में शरीर का तापमान गिरने का खतरा अधिक रहता है।
डॉक्टरों की सलाह
ठंड के दिनों में बच्चों को पर्याप्त गर्म कपड़े पहनाने, रात में शरीर ढककर रखने और ठंडी हवा के सीधे संपर्क से बचाने की सलाह दी जा रही है। किसी भी असामान्य लक्षण पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।





