सीजी भास्कर 22 जनवरी Congress Mandal President Controversy : छत्तीसगढ़ की राजनीति में संगठन ही किसी दल की असली ताकत माना जाता है, लेकिन जब वही संगठन जमीनी हकीकत से कटता नजर आए, तो सवाल उठना स्वाभाविक है। गरियाबंद जिले के मैनपुर ब्लॉक से सामने आए एक मामले ने पार्टी की आंतरिक कार्यप्रणाली पर चर्चा तेज कर दी है ।
सूची में शामिल हुआ दिवंगत नाम
हाल ही में जारी मंडल अध्यक्षों की सूची में इंदागांव मंडल अध्यक्ष के तौर पर स्वर्गीय रूपेंद्र सोम का नाम दर्ज किया गया। हैरानी की बात यह है कि रूपेंद्र सोम का निधन 22 अगस्त 2025 को हो चुका है। वे पार्टी के सक्रिय और सम्मानित कार्यकर्ता रहे हैं और पूर्व में आदिवासी ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी भी संभाल चुके थे।
तकनीकी चूक या संवाद की कमी
किसी दिवंगत व्यक्ति को संगठनात्मक पद सौंपे जाने की घटना यह संकेत देती है कि जिला स्तर से भेजी गई जानकारी और प्रदेश स्तर पर तैयार सूची के बीच समन्वय की कमी रह गई। स्थानीय कार्यकर्ताओं का कहना है कि अगर अंतिम सूची से पहले एक बार जमीनी सत्यापन हो जाता, तो यह स्थिति पैदा नहीं होती ।
कार्यकर्ताओं में असहजता
इस घटनाक्रम के बाद क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं में खामोशी के साथ नाराज़गी भी देखी जा रही है। उनका मानना है कि संगठन को उन लोगों की जानकारी समय पर रखनी चाहिए, जिन्होंने वर्षों तक पार्टी के लिए काम किया। दिवंगत नेता के नाम का इस तरह सामने आना कई सवाल छोड़ गया है।
विपक्ष ने कसा तंज
मामले को लेकर विपक्षी दलों ने भी संगठन की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि यह पूरी तरह एक मानवीय और तकनीकी त्रुटि मानी जा रही है, लेकिन संगठन विस्तार और चुनावी माहौल के बीच ऐसी चूक पार्टी के लिए असहज स्थिति बना सकती है।
पार्टी ने दी सफाई
इस पूरे मामले पर जिला कांग्रेस कमेटी गरियाबंद के अध्यक्ष सुखचंद बेसरा ने कहा कि 21 जुलाई को प्रदेश स्तर से मंडल अध्यक्षों के गठन के निर्देश मिले थे। 30 जुलाई को सभी नाम भेज दिए गए थे। इसके बाद 22 अगस्त को रूपेंद्र सोम का निधन हुआ। वर्तमान में नए नाम का प्रस्ताव भेज दिया गया है और सूची में आवश्यक सुधार किया जाएगा।


