सीजी भास्कर, 14 जून : रतनपुर के ऐतिहासिक बिकमा तालाब में मगरमच्छ (Crocodile Hatchlings) के अंडों से निकले छह नवजात शावकों के मिलने से क्षेत्र में उत्सुकता का माहौल बन गया। सुबह तालाब पहुंचे स्थानीय लोगों ने बच्चों को देखा और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए तत्काल वन विभाग को सूचना दी। वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर सभी शावकों का सुरक्षित रेस्क्यू किया और बाद में उन्हें खूंटाघाट बांध में छोड़ दिया।
स्थानीय लोगों की सतर्कता से बची शावकों की जान
जानकारी के अनुसार सुबह स्नान के लिए तालाब पहुंचे लोगों की नजर मगरमच्छ के नवजात बच्चों पर पड़ी। शावकों को किसी तरह का नुकसान न पहुंचे, इसके लिए स्थानीय नागरिकों ने उन्हें सुरक्षित स्थान पर रखा और वन विभाग तथा पुलिस को सूचना दी।
सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और सभी छह शावकों को अपने संरक्षण में लिया। आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद उन्हें सुरक्षित प्राकृतिक वातावरण उपलब्ध कराने के लिए खूंटाघाट बांध में छोड़ दिया गया।
बिकमा तालाब में पहले से मौजूद हैं मगरमच्छ
वार्ड पार्षद मनोज पाटले ने बताया कि बिकमा तालाब में पहले से तीन मगरमच्छ मौजूद हैं, जिनकी निगरानी वन विभाग द्वारा की जाती है। तालाब में मगरमच्छों की मौजूदगी के कारण समय-समय पर लोगों को सतर्क रहने की सलाह भी दी जाती है। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मगरमच्छों के प्राकृतिक प्रजनन को देखते हुए क्षेत्र में निगरानी बढ़ाई जाएगी ताकि वन्यजीवों और लोगों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
250 साल पुराना है बिकमा तालाब
रतनपुर का बिकमा तालाब क्षेत्र की ऐतिहासिक धरोहरों में शामिल है। बताया जाता है कि इसका निर्माण करीब 250 वर्ष पहले मराठा शासक विंबाजी राव भोसले के शासनकाल में कराया गया था। यह तालाब स्थानीय इतिहास, संस्कृति और धार्मिक मान्यताओं से भी जुड़ा हुआ माना जाता है। स्थानीय लोगों के अनुसार तालाब की खुदाई के दौरान भगवान श्रीराम की एक प्रतिमा प्राप्त हुई थी, जिसे वर्तमान में रामटेकरी स्थित श्रीराम मंदिर में स्थापित किया गया है। हालांकि इस संबंध में प्रमाणिक ऐतिहासिक दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं।
आस्था और इतिहास का केंद्र बना हुआ है तालाब
स्थानीय निवासी अजय गुप्ता का कहना है कि मंदिर में स्थापित प्रतिमा में भगवान श्रीराम को अजानुबाहु स्वरूप में दर्शाया गया है। वहीं पुरातत्व से जुड़े जानकारों का मानना है कि प्रतिमा मिलने की मान्यता स्थानीय आस्था का विषय है, लेकिन इसके ऐतिहासिक प्रमाणों पर और अध्ययन की आवश्यकता है। फिलहाल बिकमा तालाब में मगरमच्छ के छह नवजात शावकों के मिलने और उनके सुरक्षित रेस्क्यू की घटना क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।





