सीजी भास्कर, 06 जुलाई : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने भिलाई नगर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव के निर्वाचन को चुनौती देने वाली चुनाव याचिका में महत्वपूर्ण आदेश दिया है। देवेंद्र यादव चुनाव याचिका (Devendra Yadav Election Petition) में हाईकोर्ट ने विधायक द्वारा दायर उस आवेदन को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने याचिका के कुछ बिंदुओं को प्रारंभिक मुद्दा मानकर मामले को बिना पूर्ण सुनवाई और बिना गवाही के जल्द समाप्त करने की मांग की थी।
चुनाव याचिका में लगाए गए हैं गंभीर आरोप
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और भाजपा नेता प्रेम प्रकाश पांडेय ने वर्ष 2024 में चुनाव याचिका दायर कर देवेंद्र यादव के निर्वाचन को चुनौती दी है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि देवेंद्र यादव ने अपने नामांकन पत्र में सोशल मीडिया अकाउंट्स, आय, संपत्ति और लंबित आपराधिक मामलों से संबंधित अनिवार्य जानकारियां छुपाई थीं। देवेंद्र यादव चुनाव याचिका (Devendra Yadav Election Petition) में इन आरोपों को लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत चुनावी कदाचार और भ्रष्ट आचरण की श्रेणी में रखा गया है।
देवेंद्र यादव की ओर से दी गई दलील
विधायक देवेंद्र यादव की ओर से अधिवक्ता बी.पी. शर्मा ने सिविल प्रक्रिया संहिता के ऑर्डर XIV रूल 2 के तहत आवेदन पेश किया था। उन्होंने दलील दी कि विधायक ने हलफनामे में सभी आवश्यक जानकारियां पारदर्शिता के साथ दी थीं और चुनाव याचिका लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 83 की अनिवार्य शर्तों को पूरा नहीं करती। इसलिए मामले को बिना गवाहों की जांच के केवल कानूनी आधार पर प्रारंभिक स्तर पर ही खारिज किया जाना चाहिए था।
याचिकाकर्ता पक्ष ने किया विरोध
प्रेम प्रकाश पांडेय की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. निर्मल शुक्ला और अधिवक्ता प्रिया मिश्रा ने इस मांग का विरोध किया। उन्होंने कहा कि जब दोनों पक्षों के बीच तथ्यों को लेकर विवाद हो, तो उसे प्रारंभिक मुद्दा नहीं माना जा सकता। देवेंद्र यादव चुनाव याचिका (Devendra Yadav Election Petition) में लगाए गए आरोपों को विधायक ने नकारा है, इसलिए यह मामला गवाहों और दस्तावेजी साक्ष्यों के परीक्षण का विषय है।
हाईकोर्ट ने क्या कहा
न्यायमूर्ति राकेश मोहन पांडेय की एकल पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और सुप्रीम कोर्ट के संबंधित फैसलों का अध्ययन करने के बाद आवेदन खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि प्रारंभिक मुद्दे केवल तभी तय किए जा सकते हैं जब मामला पूरी तरह कानून का हो या अविवादित तथ्यों पर आधारित हो। वर्तमान मामले में यह साबित करने का भार याचिकाकर्ता पर है कि विधायक ने जानकारियां छुपाईं और इससे चुनाव प्रभावित हुआ। वहीं विधायक को यह साबित करना होगा कि उन्होंने सभी जानकारियां सही तरीके से दी थीं। ये प्रश्न केवल गवाहों और दस्तावेजी साक्ष्यों के मूल्यांकन के बाद ही तय किए जा सकते हैं।
अब नियमित सुनवाई चलेगी
हाईकोर्ट द्वारा आवेदन खारिज किए जाने के बाद अब देवेंद्र यादव चुनाव याचिका (Devendra Yadav Election Petition) पर नियमित और विस्तृत सुनवाई चलेगी। दोनों पक्ष अदालत के सामने अपने गवाह और दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत करेंगे। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 4 अगस्त 2026 की तारीख तय की है।



